सहारनपुर। रामपुर मनिहारान में तीन सितंबर को होने वाली राष्ट्रीय लोकदल की स्वाभिमान रैली आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की दिशा तय करेगी। 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद सहारनपुर में रालोद की यह बड़ी रैली है, जिसके लिए मेरठ, बागपत, बिजनौर, मुजफ्फरनगर और शामली समेत अन्य जिलों के नेताओं ने डेरा डाल दिया है। रैली को ऐतिहासिक बनाने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में रैली में उमड़ने वाली भीड़ पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं।
दरअसल, रालोद की कोशिश पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपने पुराने सियासी प्रभाव को और मजबूत करने की है। रैली से पहले ही पश्चिमी यूपी के कई बड़े नेताओं का सहारनपुर में जमावड़ा लग चुका है। बागपत और बिजनौर के सांसदों के साथ पार्टी के प्रमुख पदाधिकारी तैयारियों में जुटे हैं। इससे रालोद इस रैली को केवल स्थानीय कार्यक्रम के बजाय पूरे पश्चिमी यूपी में शक्ति प्रदर्शन के रूप में पेश करने की तैयारी में है।
2022 में रालोद ने सपा के साथ गठबंधन कर विधानसभा चुनाव लड़ा था। इसके बाद पार्टी की राजनीतिक राह बदली और वह एनडीए का हिस्सा बन गई। अब 2027 के चुनाव से पहले जयंत चौधरी की सहारनपुर में रैली इस बदले राजनीतिक समीकरण के बीच पार्टी की ताकत परखने का मौका भी है। रामपुर मनिहारान सीट को लेकर रालोद की सक्रियता भी सियासी चर्चा का केंद्र है। रैली में भीड़ और नेताओं की मौजूदगी के साथ जयंत चौधरी के संदेश से यह संकेत मिल सकता है कि पार्टी आगामी चुनाव में सहारनपुर में किस तरह की भूमिका चाहती है।
खास बात यह है कि जयंत की रैली से एक दिन पहले दो सितंबर को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी सहारनपुर पहुंचेंगे। लगातार दो दिन बड़े नेताओं की मौजूदगी के बीच रालोद की स्वाभिमान रैली पर सभी की नजर रहेगी। रैली बताएगी कि 2027 के चुनाव में रालोद पश्चिमी यूपी में कितनी मजबूत दावेदारी के साथ उतरने की तैयारी में है।
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रैली को लेकर पुख्ता तैयारी कर ली गई है। यह ऐतिहासिक रैली होगी। पदाधिकारी और कार्यकर्ता दिन-रात प्रचार-प्रसार में लगे हुए हैं। 2027 में पूरे उत्साह के साथ चुनाव मैदान में उतरा जाएगा।
चौधरी धीर सिंह, प्रदेश सचिव रालोद