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Saharanpur: किसानों से कब्जा मुक्त कराई अधिग्रहित भूमि, तनाव को देखते हुए भारी फोर्स तैनात

Tue, 30 Apr 2024 07:48 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, सहारनपुर

सार

Saharanpur News : सहारनपुर में अधिकारियों ने हाईवे के लिए अधिग्रहित की गई भूमि को कब्जा मुक्त कराया। इस दौरान अधिकारियों को किसानों के विरोध का सामना करना पड़ा।
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विरोध करती महिला। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सहारनपुर में तीतरों में निर्माणाधीन शामली-अंबाला हाईवे के लिए अधिग्रहीत की गई भूमि को कब्जा मुक्त कराने में मंगलवार को अधिकारियों के पसीने छूट गए। तीन गांवों के किसानों ने जमकर विरोध किया। तनाव को देखते भारी संख्या में कई थानों की फोर्स मौके पर मौजूद रही। पता चलने पर जिलाधिकारी ने मौके पर पहुंचकर किसी तरह किसानों को समझाकर शांत किया। तब जाकर भूमि को कब्जा मुक्त कराया गया। गेहूं की फसल भी काटी गई।

ऐसे समझे मामला
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तीतरों क्षेत्र के बाल्लू, कलसी और रामरायखेड़ी की भूमि का शामली-अंबाला हाईवे के लिए अधिग्रहण किया गया है। किसान अधिग्रहीत की जाने वाली भूमि के बदले प्रशासन से मुआवजे की मांग कर रहे थे, जबकि प्रशासन का कहना था कि उक्त भूमि 132 श्रेणी की बंजर ढाक है। इसका मुआवजा नहीं, बल्कि भूमि के बदले भूमि दी जा सकती है। मुआवजे की मांग को लेकर किसानों ने करीब दो माह निर्माणाधीन हाईवे पर धरना प्रदर्शन किया था। जिससे हाईवे का काम भी रुक गया था। हालांकि एसडीएम नकुड़ के आग्रह पर निर्माण कार्य के लिए सामग्री लाने ले जाने के लिए थोड़ा रास्ता दे दिया गया था।

ऐसा चला घटनाक्रम, जिलाधिकारी ने संभाली स्थिति
मंगलवार को हाईवे अथाॅरिटी और तहसील प्रशासन के अधिकारियों ने अधिग्रहीत भूमि पर कब्जा लेना चाहा, जिस पर किसान अपने परिवारों के साथ विरोध में आ गए। किसानों व प्रशासन के बीच करीब दो घंटे तक कब्जे को लेकर वार्ता होती रही। भारी पुलिस बल भी तैनात रहा। पता चलने पर जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र वहां पहुंचे। उन्होंने किसानों को समझाने का प्रयास किया। किसानों जयपाल सिंह, जनेश्वर, मागेंराम वाल्मीकि, महावीर सिंह, अनिल कश्यप, राजू कश्यप, बबीता, सुमन आदि ने आरोप लगाया कि प्रशासन उन्हें मुआवजा नहीं दिला पा रहा। गेहूं की फसल के नुकसान की भरपाई भी नहीं हुई।

इसके अलावा उनके खिलाफ ही मामले दर्ज कर दिए गए। इस पर जिलाधिकारी ने एसडीएम नकुड़ संगीता राघव को तत्काल प्रभाव से दर्ज हुए मुकदमे वापस लेने के निर्देश दिए, साथ ही किसानों को प्रशासन की तरफ से हर संभव मदद का आश्वासन दिया। तब जाकर किसान शांत हुए। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी सुमित महाजन, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व रजनीश मिश्र, सिटी मजिस्ट्रेट गजेंद्र सिह, हाईवे अथाॅरिटी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर असीम बंसल आदि मौजूद रहे।

मशीन के आगे लेटकर दहाड़े मारने लगी महिला किसान
शामली-अंबाला हाईवे में महिला किसान चंदो देवी की करीब नौ बीघा भूमि अधिग्रहीत की गई है। महिला का आरोप है कि हाईवे अथाॅरिटी एवं चकबंदी विभाग के कर्मचारियों ने उसका नाम थ्रीडी सूची में शामिल नहीं किया है। मंगलवार को जब महिला किसान को भूमि पर प्रशासन द्वारा कब्जा किए जाने की सूचना मिली तो वह हाईवे अथाॅरिटी की मशीनों के सामने लेटकर दहाड़ मारकर रोने लगी। महिला का कहना था कि जब उनकी भूमि ही चली गई तो जिंदा रहकर क्या करेंगे। एसडीएम नकुड़ संगीता राघव ने महिला किसान को पानी पिलाकर हर संभव मदद का आश्वासन दिया।

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जिलाधिकारी ने बताया कि शामली-अंबाला हाईवे की 4.5 किमी भूमि पर विवाद था। जिसमें से चार गांवों की 1.5 किमी भूमि पर शासन द्वारा आदेश के बाद जिला प्रशासन ने कब्जा ले लिया है। गांव बालू, कलसी व रामरायखेड़ी क्षेत्र में पड़ने वाली शेष तीन किलाेमीटर भूमि पर हाईवे अथाॅरिटी ने भूमि को समतल करके निशानदेही कर दी है। कुछ किसानों को जमीन के बदले जमीन दे दी गई है। प्रशासन किसानों के साथ है, हर समस्या का समाधान होगा। - डॉ. दिनेश चन्द्र, जिलाधिकारी

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