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Saharanpur News: न बिजली, न पानी, टपकती छत, यह कैसी व्यवस्था

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कैसी है पाठशाला : प्राथमिक वन विद्यालय सोढ़ीनगर की टूटी पड़ी चारदीवारी। संवाद
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ये कैसी पाठशाला :
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- टाट पट्टी पर बैठकर पढ़ाई कर रहे बच्चे, 50 बच्चों पर शिक्षक भी मात्र एक
- टूटी पड़ी है चहारदीवारी, जंगली जानवरों का भी खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिहारीगढ़। शिवालिक वन प्रभाग की मोहंड रेंज के जंगल में स्थित वन ग्राम प्राथमिक विद्यालय बदहाल स्थिति में है। स्कूल में पीने के लिए पानी नहीं है, पंखे आदि के लिए बिजली नहीं है और यहां तक कि चहारदीवारी भी टूटी पड़ी है। टपकती छत के नीचे टाट पट्टी पर बैठकर बच्चे पढ़ने के लिए मजबूर हैं।
विकासखंड मुजफ्फराबाद के की ग्राम पंचायत गणेशपुर के मजरा सोढ़ीनगर में स्थित इस प्राथमिक विद्यालय की इमारत 1998 में बनी थी। यानी मुश्किल से 26 वर्ष पुराना भवन है, जो रखरखाव नहीं होने की वजह से इस हालत में पहुंच गया है कि छत टपक रही है। करीब 50 बच्चे पढ़ते हैं। शिक्षिका मात्र एक है। नियमानुसार दो शिक्षक होने चाहिए। चहारदीवारी नहीं होने के कारण जंगली जानवरों का खतरा रहता है। अभिभावक सतीश, धर्मवीर, मांगेराम, श्यामू, सोम सिंह ने बताया विद्यालय में बच्चों को भेजने के बाद भी भय बना रहता है कि कहीं जंगली जानवर कोई नुकसान न पहुंचा दे।
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विद्यालय में न तो बिजली कनेक्शन है और न ही बच्चों के पीने के लिए शुद्ध पानी, जबकि विद्यालयों में चले कायाकल्प अभियान के 19 बिंदुओं में यह प्रमुख हैं। बिजली नहीं हैं तो पंखे और लाइट होने का सवाल ही नहीं है। ऐसे में बच्चों को पेड़ों की छांव में बैठाकर पढ़ाया जाता है। फर्नीचर भी नहीं है। टाट पर बैठकर पढ़ते हैं।
- वन क्षेत्र के बच्चों को अधिक जरूरत
वन क्षेत्र के बच्चे खासकर वन गुर्जरों के बच्चे शिक्षा से अधिक जुड़े हुए नहीं हैं। चार वर्ष पहले तत्कालीन मंडलायुक्त के निर्देश पर विभाग ने वन क्षेत्र में विशेष शिविर लगाकर अभिभावकों से बात की थी और बच्चों को हर हाल में विद्यालय भेजने की अपील की थी। इसके बावजूद वन क्षेत्र के विद्यालय में बुनियादी सुविधाएं नहीं होना लापरवाही को दर्शाता है।
- एक शिक्षक के भरोसे 102 विद्यार्थी
बड़गांव। विकास खंड नानौता के गांव बहेड़ा स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। विद्यालय में 102 बच्चे पंजीकृत हैं, जिनमें 55 बालिका और 47 बालक शामिल हैं। नियमानुसार यहां तीन शिक्षक तैनात होने चाहिए, लेकिन मात्र एक शिक्षक है। पढ़ाई के अलावा अन्य कागजी काम के लिए शिक्षक को यदि विभागीय कार्यालय आदि पर जाना पड़े तो बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई नहीं बचता। ग्राम प्रधान रमेश कश्यप का कहना है कि वह कई बार खंड शिक्षा अधिकारी से मिले हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
- विद्यालयों में ही बनता है भोजन
विद्यार्थियों को मध्याह्न भोजन देने की व्यवस्था है। चूंकि विद्यालय ग्रामीण क्षेत्र के हैं। ऐेसे में भोजन विद्यालयों में ही तैयार किया जाता है। इसके लिए रसोई बनी है और रसोई माता रखी गई हैं।
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- सोढ़ीनगर का विद्यालय वन विभाग का है, जिसमें शिक्षा विभाग अपने स्तर से काम नहीं करा सकता है। फिर भी विभागीय प्रयास यही रहता है कि विद्यार्थियों को किसी प्रकार की कठिनाई न हो। - कोमल, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी

कैसी है पाठशाला : प्राथमिक वन विद्यालय सोढ़ीनगर की टूटी पड़ी चारदीवारी। संवाद

कैसी है पाठशाला : प्राथमिक वन विद्यालय सोढ़ीनगर की टूटी पड़ी चारदीवारी। संवाद

कैसी है पाठशाला : प्राथमिक वन विद्यालय सोढ़ीनगर की टूटी पड़ी चारदीवारी। संवाद

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