- यूरोपीय संघ की तरफ से पारित किए गए नए कानून में फेर में उलझेगा कारोबार
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। यूके से मुक्त व्यापार समझौते के बीच जिले के हैंडीक्राफ्ट उद्योग को झटका लगा है। यूरोपियन यूनियन ने एक जनवरी 2026 से ईयूडीआर(यूरोपियन यूनियन डिफॉरेस्टेशन रेगुलेशन) कानून लागू किया है। इसके तहत लकड़ी के उत्पादों के लिए निर्यातकों को चेन ऑफ कस्टडी देनी होगी, जिसमें लकड़ी के स्रोत से लेकर अंतिम उत्पाद का रिकॉर्ड होगा।
जिले का वुडन हैंडीक्राफ्ट उद्योग पहले से ही ट्रंप के टैरिफ से सहमा है। इससे बाद यूके से मुक्त व्यापार समझौते से निर्यातकों को कुछ राहत की उम्मीद दिखी थी, लेकिन यूरोपियन यूनियन के देशों ने जंगलों की अवैध कटाई रोकने के लिए नया कानून लागू किया है। नए कानून के तहत शीशम, आम, बबूल आदि की लकड़ियों से बने उत्पाद का रिकॉर्ड रखना होगा। ईयूडीआर के तहत लकड़ी, प्लाईवुड पैकेजिंग, मटेरियल व अन्य संबंधित उत्पादों के स्रोत से ट्रैसबिलिटी, जियो टैग लोकेशन और संपूर्ण प्रक्रिया को प्रमाणित करना जरूरी होगा। ऐसे में जिन निर्यातकों के पास ईयूडीआर सर्टिफिकेट नहीं होगा।
वह यूरोप के देशों को माल नहीं भेज सकेंगे। इसके चलते जिले से होने वाले निर्यात को झटका लगने की संभावना है। जिले के हैंडीक्राफ्ट उत्पादों का सबसे बड़ा आयातक अमेरिका है, लेकिन टैरिफ के चलते अमेरिका के खरीदार अभी आयात से दूरी बनाए हैं। ऐसे में निर्यातक सरकार से राहत की उम्मीद लगाए हैं। निर्यातकों ने सरकार से वन विभाग के डिपो से ही सर्टिफाइड कच्चा माल के सप्लाई की मांग की है। उनका कहना है कि निर्यातकों को राहत के लिए सरकार को ओर कदम उठाने चाहिए।
- बोले कारोबारी
निर्यातक और चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड सर्विसेस के अध्यक्ष रविंद्र मिगलानी ने कहा कि नए कानून के लागू होने से कच्चा माल की कीमत बढ़ जाएगी। ऐसे तैयार माल महंगा होगा। इसके अलावा ईयूडीआर सर्टिफिकेट से खरीदार को माल खरीदने में भी कठिनाई होगी। इसका सीधा असर निर्यात पर पड़ेगा।
- आईआईए सहारनपुर चैप्टर चेयरमैन गौरव चोपड़ा ने कहा कि यूरोपियन यूनियन के नए कानून के लागू होने से बाजार पर असर पड़ेगा। पहले टैरिफ और अब यह नया कानून। हैंडीक्राफ्ट उद्योग के लिए कठिन समय है। हमें बदलते समय के साथ अपनी कारोबार के तरीकों में बदलाव करना होगा। इसके साथ ही परंपरागत बाजार के साथ अन्य बाजार में भी संभावनाएं तलाशनी होगी।