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बायो मास की एनर्जी से दोगुनी बिजली तैयार कर रहा नगर निगम

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सहारनपुर। कान्हा उपवन गोशाला में लगा गोबर गैस प्लांट, बायोमास की एनर्जी मिलने के बाद दोगुनी बिजली तैयार कर रहा है। इस बिजली से नगर निगम गोशाला में बिजली की जरूरतें पूरी कर रहा है। खास बात यह है कि प्लांट के चालू होने के बाद नगर निगम को कान्हा उपवन के लिए बिजली के कनेक्शन की जरूरत नहीं रह गई है।
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गोबर गैस से बिजली बनाने की तकनीक पुरानी है। मगर नगर निगम सहारनपुर में नई तकनीक के साथ बिजली उत्पादन कर रहा है। वार्ड नंबर आठ के गांव मढ़ में ढमोला किनारे 50 मीटर क्षेत्रफल के आठ चैंबर बनाए गए हैं, जिसे फाइटो रैमेडिएशन कहा जाता है। उक्त चैंबरों में गंदा पानी जमा होता है। इस पानी के ऊपर जलीय पौधे जैसे पिस्टिया (जलपरी), लैमना और माइक्रो एल्गी यानी सूक्ष्म सहवाल उगाए जा रहे हैं। यह जलीय पौधे, जिन्हें बायोमास कहा जाता है प्रतिदिन 17 प्रतिशत की वृद्धि कर रहे हैं। जलीय पौधे गोशाला स्थित गोबर गैस प्लांट में भेजे जाते हैं। निगम के पर्यावरण प्लानर डॉ. उमर सैफ ने बताया कि बायो मास गोबर से दोगुनी नाइट्रोजन देते हैं। इसी कारण बायो मास को गोबर के साथ मिलाकर दोगुनी गैस तैयार हो रही है, जिससे बिजली भी दोगुनी ही बनाई जा रही है। सैफ ने बताया कि यह निगम का पायलट प्रोजेक्ट है, जो सफल रहा है। नगर निगम इसे बड़े पैमाने पर करने की तैयारी में है।
यहां इस्तेेमाल हो रही बिजली
गोबर गैस प्लांट से तैयार हो रही बिजली का इस्तेमाल गोवंशीय पशुओं के लिए घास कटाई मशीन चलाने, रोशनी, पंखे और कूलर चलाने में कर रहा है। गोशाला में 24 घंटे बिजली रहे। इसके लिए इन्वर्टर लगाए गए हैं, जिनको गोबर गैस प्लांट से बन रही बिजली से ही चार्ज किया जाता है।
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फिनायल भी बनाया गया
कान्हा उपवन गोशाला में गोमूत्र से फिनायल बनाने का भी प्रोजेक्ट लगाया गया था। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर यह सफल भी रहा, लेकिन अन्य गोशाला में इसे लागू नहीं किया जा सका।
गोबर के साथ बायोमास को मिलाकर गैस तैयार करना और उससे बिजली उत्पन्न कराई जा रही है, जिसमें नगर निगम सफल रहा है। गोशाला परिसर स्थित प्लांट से गोशाला की जरूरत की बिजली पैदा कर पा रहे हैं। भविष्य में इसे और बड़े पैमाने पर करने की योजना है।
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-- ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त।
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