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मिनी सचिवालय तो बने, सुविधाएं मयस्सर नहीं हुई

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खुदाबक्सपुर माजरा में बंद पड़ा मिनी सचिवालय - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। पंचायती राज दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गांवों में मिनी सचिवालयों की स्थापना पर जोर दिया है। अधिकांश गांवों में मिनी सचिवालय बने भी हैं। अमर उजाला की टीम ने जब इनमें मिलने वाली सुविधाओं की पड़ताल की तो पाया कि योजना लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। अभी सभी गांवों में मिनी सचिवालय नहीं बन सके हैं। जहां बने भी हैं वहां उनमें संबंधित कर्मचारी नहीं बैठ रहे हैं। ऐसे में ग्रामीणों को अपने कार्यों के लिए ब्लाक मुख्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। कई जगहों पर तो देखरेख के अभाव में सचिवालय खंडहर हो गए हैं और उनमें भूसा और उपले भरे हैं।
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महेशपुर में खंडहर में तब्दील हुआ सचिवालय
बड़गांव क्षेत्र के गांवों दल्हेड़ी, उमरी मजबता, झबीरन, महेशपुर, सिसौनी बहेड़ा, मियानगी, टपरी, सिरसली, मिर्जापुर आदि में अभी तक मिनी सचिवालय बन कर तैयार ही नहीं हुए हैं। इन गांव में प्रधानों के घरों से ही काम काज चल रहा है। महेशपुर में बना पंचायत घर जर्जर हालत में है। इसके दरवाजे और खिड़कियां तक गायब हो चुकी है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि कमल राणा ने बताया कि पंचायत घर की मरम्मत के लिए विभाग को लिखित में सूचित किया जा चुका है, लेकिन अभी बजट नहीं आया है।
सचिवालय में भरे हैं भूसा और उपले
तीतरों के ग्राम बाल्लू का सचिवालय बदहाली का शिकार है। अवैध कब्जा धारकों ने इसमें भूसा और उपले भर रखे हैं। एक बुग्गी भी बरामदे में खड़ी है। यहां से कोई भी सुविधा ग्रामीणों को नहीं मिल पा रही है। ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के लिए ब्लॉक मुख्यालय व प्रधान के घर पर चक्कर काटने को विवश हैं। ग्राम पंचायत सचिव नीटू कुमार को अवैध कब्जे की जानकारी भी नहीं है। प्रधान राजेश सैनी कहते हैं कि जल्द ही ग्राम सचिवालय को कब्जा मुक्त कराया जाएगा।
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15-15 दिन गांव में नहीं आते सचिव
ब्लॉक मुजफ्फराबाद की ग्राम पंचायत बादशाहपुर में मिनी सचिवालय का निर्माण कछुवा गति से लंबे समय से चल रहा है। राजेश कुमार, अंकित, गुरदेव सिंह, रियाजुल, असलम, जाकिर, रमेश आदि ग्रामीणों ने बताया कि सचिव गांव में 15-15 दिन तक गांव में नहीं आते हैं। मोबाइल भी स्विच ऑफ रखते हैं। जन्म मृत्यु प्रमाणपत्र, परिवार रजिस्टर नकल आदि प्रपत्र लेने के लिए उन्हें भटकना पड़ता है। ग्राम पंचायत तकीपुर व औरंगाबाद में भी सचिवालय नहीं बन सके हैं। बीडीओ केके सिंह ने बताया कि जल्द ही सभी पंचायतों में सचिवालयों का निर्माण कार्य पूरा करा दिया जाएगा।
मिनी सचिवालय तो बने, सुविधा नहीं
देवबंद क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में मिनी सचिवालय तो बने हैं, लेकिन उनमें अभी ग्रामीणों को सुविधाएं मिलना आरंभ नहीं हुई है। चंदेना कोली में मिनी सचिवालय तो बना दिया गया, लेकिन पंचायत सहायक तैनात नहीं है। बीडीओ आजम अली ने बताया कि ब्लॉक की कुछ पंचायतों में मिनी सचिवालय निर्माणाधीन हैं। कुछ में अभी पंचायत सहायक द्वारा त्यागपत्र दिए जाने के चलते स्थान रिक्त पड़े हैं। दिनवार रोस्टर बनाया जा रहा है। सोमवार से रोस्टर का अनुपालन कराया जाएगा।
चार-चार गांवों का चार्ज, नहीं मिलता समय
गांव बढेड़ी कोली में पंचायत घर में सचिवालय बना है। गांव के संजय कुमार, जयपाल सिंह, मांगेराम, संजय चौधरी आदि का कहना है कि सचिवालय में ग्राम सचिव न के बराबर ही बैठता है। सचिवालय में सहायक भी तैनात नहीं है जिससे ग्रामीणों को अपने काम के लिए ब्लॉक मुख्यालय पर चक्कर लगाने पड़ते हैं। ग्राम सचिव रविंद्र कुमार का कहना है कि उनके चार्ज में चार गांव हैं जिनके बीच की दूरी भी ब्लॉक मुख्यालय से काफी है। कार्य व्यस्तता के चलते सचिवालय में बैठना मुश्किल होता है।

महेशपुर में खंडहर में तब्दील हुआ सचिवालय- फोटो : SAHARANPUR

गांव बालू के ग्राम सचिवालय में भरा भूसा- फोटो : SAHARANPUR

गांव बालू में बदहाल पड़ा ग्राम सचिवालय, इसमें अंदर भूसा और उपले भरे हैं।- फोटो : SAHARANPUR

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