सहारनपुर। महामंडलेश्वर संत कमल किशोर और पंचतीर्थी आश्रम के महंत स्वामी रामदेव ने कहा कि देेश भर में चार लाख मठ-मंदिरों पर राज्य सरकारों का नियंत्रण है, जबकि मस्जिदों और गिरजाघरों पर कोई नियंत्रण नहीं है। उन्होंने मांग की कि मठ-मंदिरों की देखरेख की जिम्मेदारी भी भक्तों को दी जाए।
दिल्ली रोड स्थित एक सभागार में पत्रकार वार्ता के दौरान महामंडलेश्वर संत कमल किशोर और स्वामी रामदेव ने सरकारों पर अवैध रूप से मठ-मंदिरों पर कब्जा करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के नटराज मंदिर को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने वाले आदेश में कहा था कि मंदिरों का संचालन और व्यवस्था भक्तों का काम है बल्कि सरकारों का नहीं। आरोप लगाया कि मठ-मंदिर में आने वाले दान को सरकारें मनमाने तरीके से खर्च करती हैं। पुजारियों को कोई वेतन नहीं दिया जाता है, जबकि मस्जिद के मौलवियों और गिरजाघरों के पादरियों को वेतन मिलता है। आरोप लगाया कि मंदिरों व मठों की देखरेख करने वाले पुजारियों का आर्थिक शोषण किया जाता है। इसी के विरोध में 21 नवंबर से दिल्ली के प्रसिद्ध मां कालिका पीठ में देशभर से साधु-संत एकत्र होकर मठ-मंदिर मुक्ति अभियान की शुरूआत करेंगे।