सहारनपुर। आज हम विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मना रहे हैं, लेकिन कोरोना काल और आधुनिकता के दौर में लोगों की दिनचर्या में आए बदलाव से मानसिक रोगियों की संख्या 30 प्रतिशत तक बढ़ी है। ऐसे में डिप्रेशन के रोगियों को चिकित्सक और अपनों की जरूरत है। इस बीमारी का इलाज भी पूरी तरह संभव है।
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अमरजीत पोपली और डॉ. एजाज अहमद का कहना है कि मानसिक रोगियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। डिप्रेशन से बचाव के लिए इन लोगों को काउंसिलिंग, अपनों के साथ और इलाज की जरूरत है। इसके साथ ही डिप्रेशन के प्रति समाज में जागरूकता की भी बहुत जरूरत है। ताकि कोई व्यक्ति मानसिक तनाव की वजह से घातक कदम न उठाएं। कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं, जब डिप्रेशन के रोगी ने खुदकशी कर ली या फिर किसी दूसरे को नुकसान पहुंचा दिया। लोगों को चाहिए कि डिप्रेशन के लक्षण दिखते ही चिकित्सक की सलाह के अनुसार उपचार कराएं। डिप्रेशन का इलाज पूरी तरह संभव है।
ऐसे करें बचाव
-- आठ से दस घंटे की नींद लें
-- घर में अकेले न रहें और खुद व्यस्त रखें
-- कोई दिक्कत है तो परिवार के सदस्यों से बात करें
-- मनोरंजन के लिए घूमने जाएं या संगीत सुनें
-- किसी भी तरह के नशे से दूर रहें
-- स्थिति खराब है तो चिकित्सक की सलाह से उपचार कराएं
यह हैं डिप्रेशन के लक्षण
- नींद न आना, अकेले रहने का मन करना
- घबराहट होना, भूख न लगना
- मन में बुरे ख्याल आना, काम न मन न लगना
- मन में खुदकशी के विचार आना
- मानसिक तनाव की वजह से एक वर्ष में हुए आत्महत्या के प्रमुख मामले
- देवबंद क्षेत्र में सिपाही ने गोली मारकर आत्महत्या की
- कोतवाली मंडी के राघवपुरम में चावल कारोबारी ने गोली मारकर खुदकशी की।
- श्यामनगर कॉलोनी में विवाहिता ने फांसी लगाकर जीवन लीला समाप्त की।
- बोमंजी रोड पर युवा फर्नीचर कारोबारी ने फांसी लगाकर मौत को गले लगाया।
- डाकघर के निकट एक बैंक से सेवानिवृत्त कर्मचारी ने गोली मारकर आत्महत्या की।