सहारनपुर। सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) बीमारी के फैलने का बड़ा कारण सिगरेट और बीड़ी का धुआं है। फिजीशियन के साथ ही चेस्ट फिजीशियन की ओपीडी में इसके मरीज लगातार पहुंच रहे हैं।
एसबीडी जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. अनिल कुमार वोहरा ने बताया कि सीओपीडी का मुख्य कारण धुंआ है। बीड़ी और सिगरेट पीने वालों को यह बीमारी अधिक रहती है। इसमें मरीज को सुबह के समय खांसी आने लगती है। साथ ही गले में खिच-खिच रहने लगती है। दूसरे स्तर पर दौड़ते समय या थोड़ा सा भी भारी काम करते सांस फूल जाती है। तीसरे स्तर में नहाते और कपड़े पहनते हुए भी सांस फूल जाती है। चौथे और अंतिम स्तर पर हाथों और पैरों में सूजन आ जाती है। अक्सर फेफड़े भी फेल हो जाते हैं।
सीओपीडी होने के कारण
सीओपीडी होने के कई कारण हैं। इनमें वायु प्रदूषण, चिमनियों से निकलने वाला धुआं, उपलों के जलने से निकलने वाला धुआं और वेल्डिंग का धुआं। मगर धूम्रपान खासकर सिगरेट इनमें सबसे खतरनाक है। सिगरेट में भरे तंबाकू के साथ ही सिगरेट का कागज भी जलता है, जिसमें से 599 तत्व निकलते हैं। इन तत्वों में मुख्यत: निकोटिन, कार्बन मोनोक्साइड, आर्सेनिक और कैडमियम जैसे रसायन शामिल हैं।