1978-79 में पुरातत्व विभाग ने की थी खोदाई
यहां मिले अवशेषों को सिंधुकालीन बताया गया
अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। जिले के ऐतिहासिक स्थलों में हुलास खेड़ा (टीला) भी सिंधुकालीन सभ्यता का गवाह है। करीब 41 साल पूर्व यहां पुरातत्व विभाग की टीम ने खोदाई भी की थी, जिसमें कई महत्वपूर्ण अवशेष मिलने पर इसे सिंधु कालीन सभ्यता से जुड़ा माना गया था। लेकिन इस टीले को संरक्षित करने की दिशा में कोई खास कार्य नहीं हो सका। अब पुरातत्व विभाग का सर्किल कार्यालय मेरठ में बनने जा रहा है तो उम्मीद जगी है कि यह ऐतिहासिक स्थल संरक्षित होगा।
गंगोह-तीतरो रोड स्थित मनोहरपुरा गांव के पास हुलास खेड़ा में वर्ष 1978-79 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की टीम ने उत्खनन करवाया था। खोदाई में यहां पर सिल बट्टे, मिट्टी के मनके और अन्य अवशेष निकले थे। साथ ही प्राचीन मकानों की नींव, मिट्टी के फर्श और खंभे गाड़ने को बनाए गड्ढे भी मिले थे। तब यह माना गया था कि 3500 साल पूर्व सिंधुकालीन सभ्यता के दौरान यहां लोग निवास करते होंगे।
अवैध कब्जे कर बना लिए गए मकान
सिंधुकालीन सभ्यता वाले हुलास टीले की जमीन पर लोग अपने मकान बनाकर रह रहे हैं। इतना ही नहीं, पशुपालन तक किया जा रहा है। जबकि इस विरासत को सहेजने और संवारने की आवश्यकता है।
यहां है महाभारतकालीन बरसी महादेव मंदिर
हुलास स्थल (टीले) के पास ही महाभारत कालीन बरसी महादेव मंदिर भी है। इस मंदिर की बुर्ज में अंदर की तरफ भित्ती चित्र भी बने हैं, जो आकर्षित करते हैं। मंदिर परिसर में ही प्राचीन वृक्ष भी है, जिसे लोग 200 से 250 वर्ष पुराना बताते हैं। यहां रहने वाली अंगूरी और लता का कहना है कि वह करीब 14 साल से यहां रहते हैं।
कई साधुओं की समाधि भी हैं यहां
प्राचीन बरसी महादेव मंदिर स्थल पर तपस्या के लिए साधू भी रहते आए हैं। वहां पर पांच साधुओं की समाधि भी मौजूद हैं। बरसी महादेव मंदिर पर पूजा अर्चना के लिए श्रद्धालु भी काफी पहुंचते हैं।