नागल (सहारनपुर)। शिवालिक की पहाड़ियों से निकली हिंडन नदी को 60 किलोमीटर दूर नागल क्षेत्र में खेतों के बीच तलाशना पड़ता है। कई जगह बरसाती नाले के रूप में ही रह गई है, जिसके दोनों किनारों पर अतिक्रमण कर खेती तक की जा रही है। निर्मल हिंडन अभियान के तहत नदी की देखरेख के लिए समिति तक बनी है, लेकिन बीते नौ महीने में कोई कार्य नहीं हुआ। पौधरोपण और कब्जा हटाओ अभियान के नाम पर लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद अनेक स्थान पर हिंडन अपने स्वरूप को पाने के लिए तरस रही है।
नागल क्षेत्र में हिंडन नदी गांव कपासी, लाखनोर, बेलड़ा जुनारदार, रसूलपुर खेड़ी, लबडोला, जैनपुर, ताशीपुर, शीतलाखेड़ा, नैनसोब और सोहनचिड़ा गांवों से होकर गुजरती है। करीब 18 किलोमीटर के इस क्षेत्र के ज्यादातर गांवों का गंदा पानी हिंडन में ही डाला जाता है। क्षेत्र में केवल लाखनोर गांव में ही यह नदी के रूप में दिखाई देती है। बाकि जगह तो केवल नाले के रूप में गुजर रही है। उधर, गागलहेड़ी क्षेत्र में हिंडन नदी के किनारे पशु अवशेष डालने को लेकर भी अधिकारी अनजान बने हैं, जबकि इससे नदी के साथ ही पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है।
पशुओं के पीने लायक नहीं पानी
- गांव सोहनचिड़ा निवासी खादिम अहमद और बेलड़ा निवासी नजाकत बताते हैं कि पूर्व में नदी किनारे पशु चराते थे तो इसी नदी का पानी पशु पी लेते थे। अब इसका पानी पशुओं को पिलाने योग्य भी नहीं रहा है।
--लाखनौर निवासी संदीप बताते हैं कि हिंडन नदी की ओर से जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी संवेदनशील नहीं हैं, जिस कारण नदी प्रदूषित हो गई है। नदी पर अतिक्रमण हो गया है। कब्जा हटाने की केवल रस्म अदायगी होती है।
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गांव लबडोला निवासी कुशलपाल राणा का कहना है कि सरकार को हिंडन नदी के प्रति गंभीर होकर धरातल पर भगीरथ प्रयास करने होंगे। अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब हिंडन अपना अस्तित्व खो देगी।
----- वर्जन
हिंडन नदी पर पूर्व में कई किलोमीटर में अतिक्रमण हटवाकर पौधरोपण कराया गया। गागलहेड़ी क्षेत्र में हिंडन वाटिका बनवाई, जो अब सुंदर स्वरूप ले चुकी है। इस साल कोरोना की वजह से कुछ दिक्कत रही। यदि हिंडन नदी की जमीन पर कहीं अतिक्रमण हुआ है और नदी को प्रदूषित किया जा रहा है तो जांच कराकर कार्रवाई कराई जाएगी। -- अखिलेश सिंह, जिलाधिकारी