जामा मस्जिद के प्रबंधक मौलाना मौलवी फरीद
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। ईद-उल-अजहा को लेकर मुस्लिम धर्म गुरुओं और प्रमुख लोगों ने कुर्बानी के सही मायनों के हिसाब ही त्योहार मनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि कोरोना काल को देखते हुए मजहबी और सरकारी नियमों को हिसाब से ही कुर्बानी दें। सरकार के निर्देशों का पूरी तरह पालन करें।
नायब शहर काजी नदीम अख्तर का कहना है कि कुर्बानी के सही मायने अल्लाह को खुश करना है। ईद-उल-अजहा पर कुर्बानी के बाद अवशेष को कहीं ऐसी जगह न डालें, जिससे किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत पहुंचे। मजहबी और सरकारी नियमों के अनुसार ही कुर्बानी दें। कोरोना काल में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखे।
जामा मस्जिद के प्रबंधक मौलाना मौलवी फरीद का कहना है कि सोशल मीडिया पर ऐसी कोई पोस्ट न डाले, जिससे किसी की भावनाएं आहत हो। कोरोना काल में सरकार की गाइड लाइन का पूरी तरह पालन करें। घरों से बाहर बेवजह न निकले, सामाजिक दूरी का पूरी तरह पालन करें और सफाई व्यवस्था का विशेष ध्यान रखे। जमीयत दावतुल मुस्लिमीन के संरक्षक कारी इस्हाक गोरा का कहना है कि कोरोना को देखते हुए पूरी सावधानी बरतें। किसी भी तरह की लापरवाही न बरते। खुले में अवशेष न डालें और सरकार के निर्देशों का पालन करे। कुर्बानी का मतलब अल्लाह को खुश करना है, न कि किसी भावनाओं को ठेस पहुंचाना।
उर्दू तालिमी बोर्ड के महासचिव दानिश सिद्दीकी और सचिव नवेद उल हक सिद्दीकी ने भी लोगों से साफ-सफाई का ध्यान रखने की अपील की। इसके साथ ही लोगों कहा कि त्योहार पर भीड़ न लगाए। घरों में रहकर ही ईद-उल-अजहा मनाएं।
जमीयत दावतुल मुस्लिमीन के संरक्षक कारी इस्हाक गोरा- फोटो : SAHARANPUR
नायब शहरकाजी नदीम अख्तर- फोटो : SAHARANPUR
उर्दु तालिमी बोर्ड के सचिव नवेद उल सिद्दीकी- फोटो : SAHARANPUR
उर्दु तालिमी बोर्ड के महासचिव दानिश सिद्दीकी।- फोटो : SAHARANPUR