सहारनपुर। जनपद की दया शुगर मिल गागलहेड़ी पर किसानों के करीब 42 करोड़ रुपये अभी भी बकाया हैं। इसमें 31 करोड़ रुपये गत सीजन और 11 करोड़ रुपये मौजूदा पेराई सत्र के हैं। हालांकि मिल के महाप्रबंधक (गन्ना) का दावा है कि मिल पर अब करीब 38 करोड़ रुपये का ही बकाया हैं। दस दिसंबर को भी उन्होंने 9.39 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।
बकाया गन्ना मूल्य भुगतान कराने के तमाम प्रयास के बावजूद जिले की चार शुगर मिलों पर अभी भी गत सीजन का गन्ना मूल्य बकाया है, साथ ही इन चीनी मिलों ने मौजूदा पेराई सत्र के गन्ना मूल्य का भुगतान करना शुरू नहीं किया है। इसके चलते किसानों के सामने आर्थिक परेशानी पैदा हो गई है। किसान संगठनों ने बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान कराने की मांग को लेकर अधिकारियों को ज्ञापन देने के साथ ही धरना प्रदर्शन भी किए हैं। इसके बावजूद समय पर गन्ना मूल्य भुगतान कराना गन्ना विभाग के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
-हमने दो मार्च तक खरीदे गए गन्ने का भुगतान कर दिया है। 10 दिसंबर को भी गत सीजन के 9.39 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। अब दया शुगर मिल पर गत सीजन और मौजूदा पेराई सत्र का करीब 38 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य के बकाया हैं। इसका भुगतान भी लगातार चीनी बेचकर किया जा रहा है। -- धनराज सिंह, महाप्रबंधक (गन्ना) दया शुगर मिल गागलहेड़ी।
गागलहेड़ी स्थित दया शुगर मिल बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान चीनी बेचकर कर रही है। मिल को चीनी बिक्री में तेजी लाकर बकाया गन्ना मूल्य का जल्द भुगतान कराने के निर्देश दिए गए हैं। -- कृष्ण मोहन मणि त्रिपाठी, जिला गन्ना अधिकारी।
बोले किसान
गांव बुड्ढ़ाखेड़ा अहीर निवासी किसान बिरम सिंह यादव ने बताया कि गागलहेड़ी स्थित दया शुगर मिल पर पिछले पेराई सत्र के साथ ही मौजूदा सीजन का भी गन्ना मूल्य बकाया है। बकाया गन्ना भुगतान नहीं होने से उनका मकान निर्माण के साथ ही पोतों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
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गांव हरियाबांस निवासी किसान अनिल कुमार सिंह ने बताया कि बकाया गन्ना मूल्य भुगतान समय से नहीं होने से किसान आर्थिक संकट में हैं। यहां तक कि उन्हें गेहूं की फसल के लिए उर्वरक भी उधार में खरीदना पड़ रहा है। आर्थिक तंगी होने से अन्य फसल भी प्रभावित हो रही हैं।
गांव रंडाली निवासी किसान पवन सैनी का कहना है कि बकाया गन्ना मूल्य भुगतान नहीं होने से घर और फसलों का खर्च उठाने में काफी परेशानी हो रही है। भुगतान नहीं होने से वे कृषि यंत्रों की मरम्मत तक भी नहीं करा पा रहे हैं।
गांव फिराहेड़ी निवासी आशीष त्यागी ने बताया कि वो छोटी जोत का किसान है। खेती से ही उनका परिवार जीवनयापन करता है। शुगर मिल पर अभी भी न सिर्फ पिछले सीजन का बकाया है बल्कि मौजूदा पेराई सत्र का भुगतान भी बकाया हो गया है।
आंकड़ों की नजर में गागलहेड़ी शुगर मिल
गन्ना आपूर्तिकर्ता किसान --- 11380
गन्ना क्षेत्रफल ----9748 हेक्टेयर
क्रय केंद्र -----32
नोट: गन्ना विभाग के 10 दिसंबर के आंकड़ों के अनुसार।
फिराहेड़ी निवासी किसान आशीष त्यागी- फोटो : SAHARANPUR
दया शुगर मिल का गेट- फोटो : SAHARANPUR