बड़गांव/सहारनपुर। गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पताल ले जाने तथा प्रसव के बाद छुट्टी होने पर जच्चा और बच्चा को सुरक्षित घर छोड़ने की जिम्मेदारी 102 एंबुलेंस की है, लेकिन इन एंबुलेंस के फेरों में फर्जीवाड़े की आशंका को देखते हुए महानिदेशक (परिवार कल्याण) ने फरवरी से अप्रैल माह तक के एंबुलेंस के फेरों की जांच कर रिपोर्ट भेजने को कहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय द्वारा रिपोर्ट भेजी जा रही है।
जनपद में कुल 65 सरकारी एंबुलेंस हैं, जिनमें 108, 102 और एएलसी (एडवांस लाइफ सिक्योरिटी) एंबुलेंस शामिल हैं। यदि किसी गर्भवती को एंबुलेंस की जरूरत होती है तो उसके या परिजनों के द्वारा 102 नंबर मोबाइल से डायल कर सेवा मांगी जाती है। इसके बाद एंबुलेंस सीधे बताए गए पते पर पहुंचकर गर्भवती को लेकर नजदीकी सरकारी अस्पताल में पहुंचती है। इसी आधार पर सेवा प्रदाता कंपनी को सरकार द्वारा गाड़ी के फेरों के आधार पर भुगतान किया जाता है, लेकिन उच्चाधिकारियों को शिकायत मिली है कि 102 एंबुलेंस सेवा गर्भवतियों की सेवा में कम और टारगेट को पूरा करने के लिए फर्जीवाड़ा करने में अधिक ध्यान दे रही है। ऐसी ही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए महानिदेशक ने 102 एंबुलेंस सेवा की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने फरवरी, मार्च और अप्रैल माह में एंबुलेंस द्वारा दी गई सेवा की जांच करने को कहा है। इसके लिए बाकायदा फॉरमेट भी महानिदेशक की ओर से भेजा गया है, जिसमें पूरी डिटेल जांच अधिकारियों को भरनी है। विभागीय अधिकारी ने बताया कि सेवा की मॉनीटरिंग के लिए सीएचसी अधीक्षक से लेकर सीएमओ तक की जवाबदेही तय की गई है। उधर, 102 एंबुलेंस सेवा के प्रभारी जितेंद्र ने बताया कि सीएमओ कार्यालय द्वारा उनसे कुछ डाटा मांगा गया था जो उन्होंने उपलब्ध करा दिया है।
जनपद में एंबुलेंस की स्थिति
एंबुलेंस-------संख्या
108---------33
102---------29
एएलएस-------03
कुल एंबुलेंस----65
सरकारी एंबुलेंस सेवा की जांच समय समय पर कराई जाती रही है, जिससे किसी प्रकार का फर्जीवाड़ा न हो सके। इस बार भी 102 एंबुलेंस सेवा की फरवरी से अप्रैल तक का ब्योरा मांगा गया है, जो महानिदेशक परिवार कल्याण को भेजा जा रहा है। हमारे यहां एंबुलेंस सेवा अच्छा कार्य कर रही है।
डॉ. संजीव मांगलिक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।