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घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य से नाखुश हैं किसान

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नीरज चौधरी - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। केंद्र सरकार की ओर से रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में की गई बढ़ोत्तरी को किसान नाकाफी बता रहे हैं। किसानों के तर्क हैं कि जिस तेजी से महंगाई बढ़ रही है, उससे फसलों की लागत में भी इजाफा हो रहा है। खासकर डीजल और कीटनाशक की महंगाई ज्यादा प्रभावित कर रही है। ऐसे में गेहूं सहित अन्य फसलों के समर्थन मूल्य की वृद्धि कम है।
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केंद्र सरकार ने बुधवार को रबी की गेहूं, जौ, चना, मसूर, सरसों और सूरजमुखी के न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की। इसमें गेहूं के भाव में 40 रुपये क्विंटल की वृद्धि कर 2015 रुपये घोषित किया। जौ का भाव 35 रुपये, चना का रेट 130 रुपये, मसूर एवं सरसों का रेट 400 रुपये क्विंटल बढ़ाया है। सूरजमुखी के भाव में 114 रुपये बढ़ोत्तरी की, लेकिन किसान संगठन इससे संतुष्ट नहीं हैं। किसानों का कहना है कि एक साल पहले डीजल का दाम 63 रुपये प्रति लीटर था जो अब 89 रुपये पहुंच गया। इस लिहाज से खेतों में जुताई आदि कार्य पर ट्रैक्टर के उपयोग में डीजल खर्च महंगा हो गया है। इसलिए फसलों का लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए।
एक बीघा गेहूं की लागत 2910 रुपये
भारतीय किसान संघ के प्रांतीय संयोजक और प्रगतिशील किसान श्यामवीर त्यागी बताते हैं कि एक बीघा गेहूं की खेती की लागत औसतन 2910 रुपये बैठती है। इसमें बीज, कटाई एवं थ्रेसिंग पर खर्च 1400 रुपये, यूरिया एवं डीएपी पर 510 रुपये और जुताई पर खर्च 500 रुपये आता है। कीटनाशक एवं खरपतवार नियंत्रण पर 250 रुपये और सिंचाई पर खर्च 250 रुपये के करीब रहता है। इसमें किसान के श्रम की कीमत शामिल नहीं है। जबकि प्रति बीघा उत्पादन औसतन ढाई क्विंटल प्रति बीघा रहता है।
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किसान, बोले 2500 रुपये क्विंटल हो गेहूं का भाव
दलहन और तिलहन के रेट में हुए बढ़ोत्तरी तो सही है, लेकिन गेहूं का भाव कम बढ़ा है। किसानों को न्यूनतम मूल्य की बजाए फसल का लाभकारी भाव मिलना चाहिए। गेहूं की एमएसपी कम से कम 2500 रुपये प्रति क्विंटल होनी चाहिए। - श्यामवीर त्यागी, प्रांतीय संयोजक (गन्ना), भारतीय किसान संघ।
एमएसपी पर फसल खरीद की गारंटी हो
रबी फसलों का बढ़ाया गया न्यूनतम समर्थन मूल्य ऊंट के मुंह में जीरा है। इससे किसान का भला होने वाला नहीं है। फिर भी सरकार किसानों को फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी दे। - चौधरी विनय कुमार, प्रदेश उपाध्यक्ष भाकियू (टिकैत)
कम बढ़ा रबी फसलों का भाव
डीजल सहित अन्य खेती में प्रयोग होने वाली वस्तुएं लगातार मंहगी हो रही है। जिससे फसलों की लागत में इजाफा हो रहा है। लागत को देखते हुए सरकार की ओर से घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य काफी कम है। - सुखवीर सिंह, कार्यकारी जिलाध्यक्ष, भारतीय किसान मजदूर संगठन।
लागत में जुड़े किसान की मेहनत भी
रबी फसलों की एमएसपीप्र की गई वृद्धि से किसान खुश नहीं हैं। फसलों की लागत के साथ ही जमीन का किराया और किसान की मेहनत को भी जोड़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित होना चाहिए। - नीरज चौधरी, राष्ट्रीय महासचिव, युवा भाकियू (अंबावत)।

श्यामबीर त्यागी- फोटो : SAHARANPUR

चौधरी विनय- फोटो : SAHARANPUR

सुखबीर सिंह- फोटो : SAHARANPUR

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