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वतन से हैं दूर, पर हिंदी के बेहद नजदीक

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- सान्या शर्मा, अटलांटा, अमेरिका - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। मातृभाषा हिंदी के प्रति जैसा प्रेम भारत में रहने वालों में है, वैसा ही अमेरिका और कनाडा में रहकर नौकरी कर रहे भारतीयों में भी है। वतन से दूर हैं, लेकिन मातृभाषा से किनारा नहीं किया है। घर परिवार में अधिकांशत: हिंदी बोलते हैं। सहारनपुर के बहुत से लोग अमेरिका और कनाडा आदि देशों में हैं। पेश है इन लोगों से हिंदी पर हुई बातचीत पर आधारित रिपोर्ट...
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-- यूएस वाले दोस्त को डेढ़ और ढाई बोलना बहुत अच्छा लगता है
सहारनपुर शहर में दिल्ली रोड पर रहने वाले अनिल शर्मा की बेटी अनुश्री इन दिनों कनाडा में हैं और मल्टीनेशनल कंपनी में इंजीनियर हैं। वह कहती हैं कि यहां कई देशों के लोग रहते हैं, सबकी मातृभाषा को बहुत सम्मान मिलता है। भारत के भी विभिन्न राज्यों के लोग यहां रहते हैं, जो जब भी मिलते हैं तो हिंदी में बात करते हैं। घर में तो हमेशा ही हिंदी बोलते हैं। बच्चों को भी हिंदी और हिंदुस्तान की संस्कृति से जोड़ने का प्रयास करते हैं। उन्होंने बताया कि उनका दोस्त जैक यूएस में रहता है, जो उनके साथ ही कंपनी में नौकरी करता है। उससे जब भी बात होती है तो डेढ़ और ढाई बोलना बहुत अच्छा लगता है। वहीं, उनके एक अन्य दोस्त ने भारतीय लड़की से शादी की है, उसने भारत आने से पहले हिंदी बोलने का खूब अभ्यास किया।
ईरानी दोस्त बोला, गणपति बप्पा मोरया
अटलांटा में मल्टीनेशनल कंपनी में सीनियर हेल्थकेयर एनालिस्ट सान्या शर्मा बताती हैं कि जितने भी दोस्त हैं,जो भारतीय हैं, उनसे हिंदी में बात करके घर का भाव पैदा होता है। जो भारतीय नहीं हैं या हिंदी भाषा नहीं जानते हैं उनको भी हिंदी सीखने की लालसा रहती है। वहीं, ईरान के रहने वाले उनके दोस्त ने एक बार उनकी कार के डैशबोर्ड पर लगी गणपति की प्रतिमा देखते ही कहा, गणपति बप्पा मोरया। ऐसा सुनकर बहुत अच्छा लगा है। उन्होंने बताया कि अटलांटा में बहुत लोग हिंदी सीखना चाहते हैं, बल्कि संस्कृत सीखने के लिए तो यहां कोर्स तक चलते हैं।
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गर्व होता है हम हिंदी बोलते हैं
मूलरूप से नानौता के रहने वाले जसवंत सिंह अमेरिका में हैं और इन दिनों जापानी कंपनी में सीनियर आर्किटेक्ट हैं। वह बताते हैं कि हिंदी बोलने में कोई हिचक महसूस नहीं होती। हम घर में भी हिंदी में सब बात करते हैं। हिंदी बहुत ही सरल और सुंदर भाषा है और हिंदी बोलने में अपनापन लगता है। सबको हिंदी का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि हिंदी हमारी मातृभाषा है।

- जसवंत सिंह, अमेरिका- फोटो : SAHARANPUR

-- अनुश्री, कनाडा- फोटो : SAHARANPUR

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