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हर दिन बढ़ रहे मनोरोगी, पहले आते थे आठ दस, अब आते हैं 200 मरीज

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हर दिन बढ़ रहे मनोरोगी, पहले आते थे आठ दस, अब आते हैं 200 मरीज
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सहारनपुर। आज विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस है। सहारनपुर जैसे छोटे शहरों में मनोरोगियों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है, जो चिंता का विषय है। अकेले मौलाना महमूद हसन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में प्रतिदिन 150 से 200 मरीज पहुंचते हैं। चिकित्सकों की मानें तो मनोरोगी होना या डिप्रेशन में चले जाना मनुष्य के लिए सबसे घातक है। मगर यदि मरीज खुद चाहे और उसे परिजनों का साथ मिले तो इंसान इस गंभीर बीमारी से बाहर आ सकता है।
मेडिकल कॉलेज के मनोरोग चिकित्सक डॉक्टर अंशुमन तिवारी बताते हैं कि अब अगस्त 2016 में उन्होंने मेडिकल कॉलेज ज्वाइन किया था तो प्रतिदिन आठ से दस मरीज मनोरोग के आते थे, मगर वर्तमान में इनकी संख्या 150 से 200 हो गई है। लगातार मरीजों की संख्या बढ़ने की एक वजह जागरूकता को भी मानते हैं। उनका कहना है कि समाज में एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ ने इंसान को मशीन बना दिया है। जब इंसान अपनी इच्छाओं की पूर्ति नहीं कर पाता है और साथी लोग उससे आगे निकल जाते हैं तो वह डिप्रेशन में आ जाता है। भागदौड़ भरी जिंदगी के साथ ही काम का अत्यधिक बोझ और परिवार की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाना भी मनोरोग की वजह बनते हैं। चिकित्सकों की मानें तो कई लोग मानसिक रोगी बनने के लिए खुद और कई बार परिजन जिम्मेदार होते हैं। संयमित जीवन जीने वाले लोग ज्यादा सुखी रहते हैं। चिकित्सकों की सलाह है कि यदि किसी परिवार में कोई व्यक्ति मानसिक तनाव यानी डिप्रेशन में है तो परिजनों को चाहिए कि वह उसे अकेला ना छोड़ें। उससे बात करें और समस्या का समाधान निकालें। क्योंकि अकेले रहने से व्यक्ति लगातार अवसाद में चला जाता है, जिससे कई बार वह गलत कदम तक उठा लेता है।
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छात्र भी हैं डिप्रेशन के शिकार
डिप्रेशन का शिकार केवल कामकाजी लोग ही नहीं, बल्कि छात्र भी बड़ी संख्या में हैं। चिकित्सकों की मानें तो ज्यादातर लोग जिंदगी में जो खुद नहीं कर पाते हैं वह बच्चों से कराने की इच्छा रखते हैं। यह लोग अपनी अपेक्षाएं बच्चों पर थोपकर उन्हें डिप्रेशन की ओर धकेलते हैं। 90 फीसदी से अधिक अंक लाने तक पर संतुष्ट नहीं रहते हैं। इससे छात्र अवसाद में चलते जाते हैं।
मानसिक रोग होने के लक्षण
- उदास महसूस करना या व्याकुल होना और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होना।
- अत्यधिक भय, चिंताएं और अपराध की भावनाएं महसूस करना।
- मनोदशा में अत्यधिक परिवर्तन और दोस्तों एवं परिजनों से दूरी बनाकर रखना।
- थकान, कम ऊर्जा या ठीक से नींद नहीं आना।
- अत्यधिक शराब पीना या नशीली दवाओं का सेवन।
- भोजन की आदतों में बड़ा बदलाव आना, काम में मन नहीं लगना।
- अत्यधिक गुस्सा आना और बात बात पर हिंसक हो जाना।
- कई बार आत्मघाती कदम उठाना।
मनोरोग की जटिलताएं
- दुख और जीवन में आनंद की कमी।
- पारिवारिक समस्याएं और रिश्तों में समस्या आना।
- सामाजिक अलगाव और नशीले पदार्थों का अत्यधिक सेवन।
- आत्महत्या करना और दूसरों को नुकसान पहुंचाना।
- दिल का मरीज होना या अन्य शारीरिक समस्या पैदा होना।
मनोरोगियों के लिए सलाह
- अच्छे चिकित्सक की सलाह से सही इलाज कराएं।
- सुबह जल्दी उठकर बाहर टहलने निकलें और योगा करें।
- खेलने के शौकीन हैं तो आसपास के लोगों के साथ टीम बनाकर प्रतिदिन अपनी मर्जी का खेल खेलें।
- घर में चुपचाप बैठे रहने की बजाय बाहर निकलें और दोस्तों से मिलें एवं अपनी समस्या बताएं।
- छुट्टी के दिन पिकनिक आदि पर जाए या फिर थिएटर में फिल्म देखने जाए।
- खुद को व्यस्त रखें, खाली समय का इस्तेमाल मौज मस्ती या मनोरंजन में करें।
जिला अस्पताल में नहीं बना मनोरोग कक्ष
एसबीडी जिला अस्पताल में मनोरोग कक्ष विकसित किया जाना है। इसके लिए उपरी मंजिल पर एक कमरा निर्धारित किया गया है। कक्ष के लिए करीब तीन लाख रुपया शासन से जारी हुआ था। एक वर्ष पहले मनोरोग कक्ष बन जाना चाहिए था, मगर अभी तक नहीं बना है। ऐसे में मनोरोगियों की काउंसिलिंग नहीं हो पा रही है।
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मनोरोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसकी वजह इच्छाओं की पूर्ति नहीं होना, भागदौड़ भरी जिंदगी और काम का बोझ एवं हमारी खराब दिनचर्या है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में प्रतिदिन 150 से 200 मरीज मनोरोग के पहुंचते हैं, जिनको हम बेहतर इलाज देने की कोशिश कर रहे हैं। - डॉ. अंशुमन तिवारी, मनोरोग चिकित्सक, राजकीय मेडिकल कॉलेज।
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