सहारनपुर। जिले में साइबर ठगी से जुड़ा बड़ा मामला सामने आया है। साइबर थाना पुलिस की जांच में करीब आठ हजार ऐसे खाते मिले हैं, जिनमें संदिग्ध लेनदेन हुआ है। ऐसे में इन खातों को लीन कराते हुए जांच शुरू कर दी गई है। अधिकतर खाते झारखंड, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल के हैं, जबकि स्थानीय लोगों के नाम पर भी खाते हैं।
दरअसल, पुलिस लाइन स्थित साइबर क्राइम थाने में हर महीने औसतन 200 से 250 मामले आते हैं। सबसे ज्यादा ठगी लालच में हो रही है। किसी अवैध लेनदेन या साइबर ठगी से जुड़ी शिकायत नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज होती है। एक विशेष सॉफ्टवेयर के माध्यम से कार्रवाई शुरू हो जाती है। यह सिस्टम न केवल संदिग्ध बैंक खाते को ब्लॉक करता है, बल्कि उनसे जुड़े अन्य खातों और लेनदेन की पूरी चेन को फ्रीज कर देता है। इसके बाद संबंधित जिले की साइबर टीम को मामला सौंप दिया जाता है।
साइबर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार ने बताया कि एक जनवरी से अब तक जिले में आठ हजार खाते ऐसे मिले हैं, जिनमें संदिग्ध लेनदेन हुआ है। इन्हें लीन करा दिया है। जांच में सामने आया कि अधिकांश खाते म्यूल अकाउंट हैं। यानी खाते किसी और के नाम से खुले हैं, लेकिन उनका उपयोग अन्य लोग कर रहे हैं। थोड़े रुपयों के लालच में कई लोग अपने बैंक खाते दूसरों को इस्तेमाल के लिए दे देते हैं। बाद में जब ठगी के रुपये उनके खाते में पहुंचते हैं, तो वह खुद भी जांच के दायरे में आ जाते हैं। पुलिस इन खातों की जांच में जुटी है।
1900 मोबाइल नंबर, 2782 आईएमईआई कराई बंद
साइबर क्राइम पुलिस ने 1900 मोबाइल नंबर और 2782 आईएमईआई बंद कराई है। इन मोबाइल नंबरों को अवैध लेनदेन में इस्तेमाल किया गया है। इन नंबरों की जांच भी की जा रही है कि किसकी आईडी पर खरीदे गए।
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ऐसे लगता है बैंक खाते पर लीन
बैंक खाते पर लीन लगने का मतलब है कि बैंक उस पर वित्तीय प्रतिबंध लगा देता है, जिससे रुपये नहीं निकाल सकते। यह आमतौर पर लोन या क्रेडिट कार्ड का बकाया न चुकाने या फिर संदिग्ध लेनदेन की जांच के कारण होता है। लीन हटाने के लिए आपको बकाया राशि का भुगतान करना होगा। बैंक, साइबर सेल या पुलिस से संपर्क करना होगा। आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे।
जो भी खाते संदिग्ध मिले हैं, उनकी गहनता से जांच की जा रही है। आम जनता से भी अपील है कि किसी भी लालच में आकर साइबर ठगी का शिकार न हो। ठगी होने पर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।
-अमित कुमार श्रीवास्तव, सीओ साइबर क्राइम