उन्होंने कहा कि इस्लाम में कुर्बानी कोई रस्म नहीं, बल्कि एक धार्मिक कर्तव्य है। केक काटने या अन्य विकल्पों की बात करने वाले शरीयत की भावना को समझ ही नहीं सकते। कुर्बानी को तर्क, पाखंड या किसी व्यक्ति की सहूलियत के तराज़ू पर नहीं तोला जा सकता।
मौलाना इस्हाक ने मुसलमानों से अपील की कि वे बकरीद के मौके पर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। जानवरों के अवशेष इधर-उधर न फेंकें, जिससे किसी की भावना आहत न हो। साथ ही उन्होंने कुर्बानी की वीडियो या फोटो को सोशल मीडिया पर शेयर करने से भी बचने की सलाह दी।
उनका यह बयान उन लोगों को सीधा जवाब माना जा रहा है जो पर्यावरण, हिंसा या वैकल्पिक तरीकों की दलील देकर कुर्बानी पर सवाल उठा रहे हैं।