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भूल से खाने-पीने पर नहीं टूटेगा रोजा

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भूल से खाने-पीने पर नहीं टूटेगा रोजा
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने रविवार को भी हेल्पलाइन के जरिए रोजेदारों के सवालों का जवाब दिए। उन्होंने कहा भूखा-प्यासा रहने के साथ साथ जिस्म के हर हिस्से का रोजा होता है। आंख, जुबान और कानों का भी रोजा होता है। आंखों का रोजा यह है कि बुरी चीजों को नहीं देखना चाहिए। कान का रोजा यह हैं कि बुरी बात नहीं सुननी चाहिए। जुबान का रोजा है कि गलत बात नहीं बोलनी चाहिए। रोजेदारों को चाहिए शरीयत के उसूल के साथ रोजा रखें।
सवाल- मुजफ्फरनगर के पुरकाजी निवासी जमाल ने पूछा कि उनको कई बीमारियां हैं। कमजोरी के कारण उन्हें भूलने की आदत है। उन्होंने रोजे की हालत में दो बार भूल से पानी पी लिया। उसके बाद एक बिस्किट भी खा लिए। अब ऐसी सूरत में उनका रोजा रहेगा या नहीं।
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जवाब- रोजे की हालत में किसी व्यक्ति ने भूल से पानी पी लिया या कुछ खा लिए तो रोजा खत्म नहीं होगा। शरीयत में आया है कि अगर रोजेदार ने भूल से कई बार खाया-पिया है तो भी उसका रोजा सलामत रहेगा।
सवाल- मेरठ निवासी इब्राहिम ने पूछा कि वह मोहल्ले की मस्जिद में तरावीह पढ़ रहे हैं, वहां के हाफिज इतनी जल्दी कुरान पढ़ रहे हैं कि अक्सर शब्द समझ में नहीं आते। इस तरह पढ़ने पर शरीयत का क्या हुकुम है।
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जवाब- अगर कोई व्यक्ति कुरान-ए-करीम को इतनी जल्दी पढ़ता है कि शब्द कटते हो तो यह एक तरह कुरान की बेअदबी और बड़ा गुनाह है। शरीयत में आया है कि इस सूरत में न तो सुनाने और न ही सुनने वाले को सवाब मिलेगा।
सवाल- देवबंद निवासी उमैर ने पूछा कि अगर कोई व्यक्ति किसी गरीब को जकात दे रहा है तो क्या उसे बताना जरूरी है।
जवाब- किसी को जकात देते समय जुबान से कहना जरूरी नहीं, बल्कि दिल में जकात की नियत होनी चाहिए।
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