वहीं, जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि कोर्ट के फैसले से धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। यह एक सच्चाई है कि कोई भी समाज केवल कानूनी बारीकियों से नहीं चलता, बल्कि सामाजिक और पारंपरिक रूप से इसका स्वीकार्य होना आवश्यक है। मदनी ने कहा कि इस फैसले के कई नकारात्मक प्रभाव होंगे। विशेषकर मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा पर असर पड़ेगा और वर्तमान में जिस तरह की परिस्थितियां उत्पन्न की गईं, उसमें वह अपनी स्वतंत्रता और भरोसा खो देंगी। उन्होंने कहा कि पर्दा हमारे देश की एक बहुत ही प्राचीन परंपरा और सभ्यता है। सदियों से पर्दा और हया की बड़ा महत्व है। इसे केवल अदालत के फैसले से मिटाया नहीं जा सकता।
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हिजाब के फैसले पर पुनर्विचार करे कोर्ट : गोरा
कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले पर जमीयत दावातुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम मौलाना कारी इस्हाक गोरा का कहना है कि कोर्ट ने जल्दबाजी में फैसला किया है। इसलिए कोर्ट को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। क्योंकि हिजाब लोगों की आस्था से जुड़ा मसला है और संवैधानिक अधिकार भी है। गोरा ने कहा कि लोगों के जहन में हिजाब को लेकर जो गलत फहमी है, उसे दूर कर हिजाब के सही अर्थ को समझना चाहिए।