ज्ञानवापी मस्जिद मामला और इबादतगाह कानून (पूजा के कानून) के खिलाफ जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस मामले पर गर्मी के अवकाश के बाद सुनवाई की उम्मीद है।
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जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने बताया कि हस्तक्षेप करने वाली इस याचिका में लिखा गया है कि जमीयत उलमा-ए-हिंद बाबरी मस्जिद राम जन्मभूमि संपत्ति विवाद मामले में एक प्रमुख पक्ष था। जिसमें प्लेस आफ वरशिप एक्ट की धारा 4 को स्वीकार कर लिया गया है और इस कानून की संवैधानिक स्थिति को सर्वोच्च न्यायालय ने भी मान्यता दी है। इसलिए अब इस कानून को चुनौती देकर एक बार फिर देश की शांति भंग करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पूजा स्थल अधिनियम 1991 को लागू करने के दो उद्देश्य थे। पहला किसी भी धार्मिक स्थल की तब्दीली को रोकना और दूसरा पूजा स्थलों को उसी में रखना था जिस स्थिति या रूप में वे 1947 में थे। मौलाना मदनी ने उम्मीद जताई के गर्मी के अवकाश के बाद कोर्ट इस पर सुनवाई करेगा।