- एक आईपीएस अधिकारी सहित अनेक पुलिसकर्मियों पर अभियोजन चलाने का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। एक आईपीएस अधिकारी सहित विभिन्न पुलिसकर्मियों पर अभियोजन चलाने के लिए स्वीकृति नहीं देने के मामले में न्यायालय विशेष न्यायाधीश की अदालत ने गृह सचिव भारत सरकार, प्रमुख सचिव गृह उत्तर प्रदेश और डीजीपी उत्तर प्रदेश को नोटिस जारी किया है। पूरा मामला एक पत्रकार पर फर्जी मुकदमे लगाकर जेल भेजने का है।
पीड़ित के अधिवक्ता राजकुमार ने बताया कि परिवादी चौधरी इमरान द्वारा 25 जुलाई 2024 को मंडी कोतवाली क्षेत्र में सट्टा, जुआ, नशे का कारोबार और मैच फिक्सिंग जैसे काम होने की खबर व्हाट्सएप ग्रुप पर चलाई थी। अगले दिन 26 जुलाई को कोतवाली मंडी इंस्पेक्टर ने उनको खबर हटाने को कहा। आरोप है कि ऐसा नहीं करने पर तत्कालीन एसपी सिटी के साथ आपराधिक षड्यंत्र करके उनके आदेश कराकर परिवादी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करा दी गई।
आरोप है कि षड्यंत्र के तहत छह अगस्त 2024 को जेल भेज दिया गया। उन्हें 18 मार्च 2025 तक अवैध रूप से जेल में रखा गया। राजकुमार ने बताया कि परिवादी न्याय के लिए उच्च न्यायालय प्रयागराज गया। उच्च न्यायालय ने लोक सेवकों द्वारा परिवादी के साथ की गई घटना को अग्रिम आदेशों तक स्थगित कर दिया गया।
अधिवक्ता ने बताया कि तत्कालीन एसपी सिटी सहित तत्कालीन कोतवाली मंडी इंस्पेक्टर और तीन उप निरीक्षकों जो विवेचक थे, पर अभियोजन चलाने के लिए परिवादी द्वारा गृह सचिव भारत सरकार, प्रमुख सचिव गृह उत्तर प्रदेश और डीजीपी उत्तर प्रदेश को पत्र लिखकर स्वीकृति मांगी थी। 120 दिन बाद भी स्वीकृति नहीं आई है। ऐसे में न्यायालय विशेष न्यायाधीश, विशेष न्यायालय संख्या 01 (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) की ओर से तीनों अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है।
अधिवक्ता ने बताया कि यदि 120 दिन तक स्वीकृति या कोई भी जवाब नहीं आता है तो स्वत: ही अनुमति समझी जाती है। इसलिए न्यायालय ने नोटिस जारी कर तीनों उच्चाधिकारियों से अंतिम बार जवाब देने को कहा है।