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माध्यमिक विद्यालयों में परवान नहीं चढ़ी को-एजुकेशन

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सहारनपुर। शिक्षा के लिए बालिकाओं को विद्यालयों के अधिकतम विकल्प देने की मंशा से माध्यमिक विद्यालयों में शुरू की गई को-एजुकेशन पूरी तरह परवान नहीं चढ़ सकी है। ज्यादातर विद्यालयों में पंजीकृत बालिकाओं की संख्या कुल पंजीकरण की दस फीसदी भी नहीं है। अधिकारियों का भी मानना है कि ज्यादातर लड़कियां को-एजुकेशन वाले विद्यालयों में तभी दाखिला लेती हैं, जब उनको उनकी मनचाही स्ट्रीम में छात्राओं के विद्यालयों में दाखिला नहीं मिल पाता है।
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जनपद में राजकीय, एडेड और वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों की संख्या 335 है। इनमें से करीब 50 फीसदी विद्यालयों में को-एजुकेशन है। को-एजुकेशन के पीछे मकसद यह भी था कि पढ़ाई के लिए लड़कियों को घर से दूर न जाना पड़े। मगर कई साल से को-एजुकेशन वाले विद्यालयों में अभी तक लड़कियों की संख्या लड़कों की तुलना में बेहद कम है। कुछ विद्यालयों में लड़कियां 200 से 300 की संख्या में हैं, लेकिन यह संख्या भी कुल संख्या से 20 से 25 फीसदी ही है। प्रधानाचार्यों ने बताया कि को-एजुकेशन वाले विद्यालयों के आसपास की भी लड़कियां ज्यादातर लड़कियों के विद्यालयों में ही पढ़ने जा रहीं हैं। जो भी लड़कियां को-एजुकेशन वाले विद्यालयों में आ रहीं हैं उनकी कोर्स या फीस संबंधी कोई न कोई समस्या है। विद्यालय घर से दूर होने की वजह से दाखिल लेने वाली छात्राओं की संख्या दो से तीन फीसदी ही है।
शहर के प्रमुख विद्यालय और छात्राओं की संख्या
बीडी बाजोरिया इंटर कॉलेज में सात साल से को-एजुकेशन है। प्रधानाचार्य राजीव रंजन के अनुसार वर्तमान में करीब 1400 विद्यार्थी पंजीकृत हैं, जिनमें से 250 से 300 ही लड़कियां शामिल हैं। बीएचएस इंटर कॉलेज में चार साल से को-एजुकेशन है। प्रधानाचार्य अरविंद शर्मा ने बताया कि पंजीकृत छात्रों की संख्या करीब 400 है, जिनमें से करीब 30 ही लड़कियां हैं। जेवी जैन कॉलेज इंटर कॉलेज में वर्षों से को-एजुकेशन है। प्रधानाचार्य दीपक गुप्ता ने बताया कि वर्तमान में करीब 1420 विद्यार्थी पंजीकृत हैं, जिनमें से मात्र 200 लड़कियां हैं। एसबीबीए इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य राजेश यादव ने बताया कि उनके यहां करीब 500 विद्यार्थी पंजीकृत हैं, जिनमें से मात्र 30 ही लड़कियां हैं।
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लड़कियों की संख्या कम होने की वजह
को-एजुकेशन वाले विद्यालयों में लड़कियों की संख्या कम होने की कई वजह सामने आई है। बीडी बाजोरिया इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य राजीव रंजन ने बताया कि घर के पास को-एजुकेशन वाला विद्यालय होने के बाद भी ज्यादातर अभिभावक अपनी बेटियों को छात्राओं के ही विद्यालयों में पढ़ा रहे हैं। इसकी वजह लड़कियों को लेकर असुरक्षा की भावना है। उन्होंने बताया कि जो लड़कियां दाखिला ले रहीं हैं। उनमें कई ऐसी हैं, जिनको विशेष स्ट्रीम लेनी थी जैसे कॉमर्स या साइंस। यदि छात्राओं के विद्यालय में वह नहीं है तो ही वह को-एजुकेशन वाले विद्यालयों में आती हैं।
जनपद के लगभग 50 फीसदी विद्यालयों में को-एजुकेशन है। ज्यादातर अभिभावक अपनी बेटियों की पढ़ाई के लिए सबसे पहले लड़कियों के ही विद्यालय को प्राथमिकता देते हैं। इसीलिए लड़कियों की संख्या कम रहती है। को-एजुकेशन वाले विद्यालयों में ज्यादातर लड़कियां वह हैं, जिनको साइंस स्ट्रीम में दाखिला लेना था, क्योंकि लड़कियों के अनेक विद्यालयों में साइंस नहीं है।
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- रविदत्त, जिला विद्यालय निरीक्षक।
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