सहारनपुर। हम अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचाररोधी दिवस मना रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन के तमाम कवायद के बावजूद सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार पर अंकुुश नहीं लग पा रहा है। जिले में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जब सरकारी कर्मचारी रिश्वत लेते हुए पकड़े गए। ठोस कार्रवाई न होने की वजह से ऐसे लोगों के हौसले बुलंद है।
केस-1-
-एंटी करप्शन टीम ने पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते बेहट तहसील के लेखपाल रियासत अली को रंगेहाथ गिरफ्तार पकड़ा था। गांव रंड़ौल निवासी भोपाल चौहान ने 23 नवंबर को एंटी करप्शन की मेरठ यूनिट को शिकायत की थी।
केस-2-
-विद्युत वितरण खंड बेहट में हुए 12 लाख 47 हजार 954 रुपये के गबन के मामले में कैशियर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। विभागीय जांच में कैश बुक व राजस्व खाते की प्रविष्टि से मिलान करने पर उक्त धनराशि के गबन की पुष्टि हुई थी। इस पर तत्कालीन अधिशासी अभियंता योगेंद्र सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने गत सितंबर में आरोपी को पकड़ा था।
केस-3-
-नकुड़ ब्लाक के गांव इस्लामनगर निवासी अमर बहादुर सहगल ने एक सरकारी कर्मचारी पर लाखों रुपये का फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगाकर डीएम से शिकायत की थी। सीडीओ की जांच में आरोपों की पुष्टि हुई थी, जिसके बाद से आरोपी कर्मचारी निलंबित है।
केस-4-
-विकास कार्यों में अनियमितता बरतने के मामले में सीडीओ की जांच के बाद जिलाधिकारी ने गांव रसूलपुरखेड़ी की पूर्व प्रधान और दो ग्राम सचिवों से 5.23 लाख रुपये की रिकवरी का नोटिस जारी किया था। जांच में सामने आया था कि विकास कार्यों के नाम पर गोलमाल किया गया है।
भ्रष्टाचार किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शिकायतें मिलने पर ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की गई है। भविष्य में भी कार्रवाई जारी रहेगी। कोई कर्मचारी किसी व्यक्ति से अगर पैसा मांगता है तो वह उसकी शिकायत उनके कार्यालय में आकर करे। -अखिलेश सिंह, जिलाधिकारी