सहारनपुर। तमाम कोशिशों के बावजूद सरकारी अस्पतालों में प्रसव दर नहीं बढ़ रही है। यह हाल तब है जब सरकारी अस्पतालों में निशुल्क जांच से लेकर जननी सुरक्षा योजना का लाभ सरकार दे रही है। तमाम सुविधाओं के भी दावे किए जाते हैं। चर्चा है कि कुछ आशा कमीशन के चक्कर में मरीजों को निजी अस्पताल में लेकर जा रही है। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग भी अनजान बना हुआ है।
जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकार स्वास्थ्य सेवाओं पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। प्रसूताओं को लाभ मिले और मातृ एवं शिशु मृत्युदर में कमी आए, इसके लिए प्रसव सरकारी अस्पतालों में कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। हर महीने जिलाधिकारी की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में भी संस्थागत प्रसव बढ़ाने के लिए निर्देश दिए जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो अप्रैल 2024 से लेकर फरवरी 2025 तक निजी व सरकारी अस्पतालों में 98,231 प्रसव हुए। इनमें निजी अस्पतालों में 66,516 सरकारी अस्पतालों में 31,715 प्रसव किए गए। चर्चा है कि कुछ आशा ऐसी हैं, जो पीड़िताओं को बेहतर इलाज कराने की बात कहकर निजी अस्पताल में ले जा रही है। इसके बदले में उन्हें 10 से 20 फीसदी कमीशन मिलता है।
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अप्रैल 2024 से फरवरी 2025 तक हुए प्रसव
सीएचसी-पीएचसी हुए प्रसव
नकुड़ 1683
रामपुर मनिहारान 943
सुनहेटी खड़खड़ी - 1025
सरसावा - 1720
मुजफ्फराबाद - 1957
साढ़ौली कदीम - 2241
नानौता - 1579
पुवांरका - 1153
गंगोह - 3833
देवबंद - 1471
नागल - 1049
चिलकाना - 1177
हरौड़ा - 562
बेहट - 827
फतेहपुर - 1601
महिला अस्पताल - 8024
रेडक्रॉस अस्पताल - 170
राजकीय मेडिकल कॉलेज - 364
स्वास्थ्य केंद्र नेहरू मार्केट - 336
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वर्जन
सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की निशुल्क जांच होती है। इसके साथ ही जननी सुरक्षा योजना का भी लाभ मिलता है। संस्थागत बढ़ाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए हैं।
- डॉ. प्रवीण कुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी