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पुरुषार्थ करने से मिलती है दुखों से मुक्ति

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सहारनपुर। तेलीपुरा गांव स्थित आर्य समाज मंदिर में आयोजित आठवें वार्षिकोत्सव में उपदेशकों ने कहा कि मनुष्य पुरुषार्थ कर बल, बुद्धि और आत्मा को शुद्ध कर सकता है। वहीं, उन्होंने समाज के हर व्यक्ति को नित्य हवन यज्ञ करने के लिए प्रेरित किया। हवन से वातावरण शुद्ध होता है।
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रविवार को आठवें वार्षिक सम्मेलन संपन्न हुआ। इसकी शुरुआत यज्ञ से की गई। इसमें सुशील सैनी, अंकुश, अनुज सैनी और अमित सैनी सपत्नीक शामिल रहे। सभा में नकुड़ से पहुंचे उपदेशक रणवीर शास्त्री ने कहा कि पुरुषार्थ तीन प्रकार का होता है। इनमें मानसिक पुरुषार्थ, शारीरिक पुरुषार्थ और बौद्धिक पुरुषार्थ शामिल हैं। किसी भी एक पुरुषार्थ के नहीं करने से मनुष्य सही मार्ग पर नहीं चल सकता है। ऋषि दयानंद ने पुरुषार्थ कर आर्य समाज को नई दिशा प्रदान की। आज पूरा आर्य समाज उनका ऋणी है।
इस दौरान भजनोपदेशक ऋषि पाल शास्त्री ने ऋषि दयानंद के आर्य समाज को किए गए उपकार को बताया। कहा कि आर्य समाज तर्कसंगत है। बिना तर्क किसी भी चीज को मानने से हम भ्रमित होते हैं। अभय सिंह आर्य ने कहा कि हम अपने घर और समाज को सुधारने का प्रयास करें। आज युवा पीढ़ी नशे की लत में पड़ रही है। इसलिए अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं।
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इस मौके पर संरक्षक धर्म सिंह, रामकिशोर, मनीराम, समाज के प्रधान सुशील आर्य, महामंत्री प्रेमचंद, व्यवस्थापक जसवीर सैनी, कोषाध्यक्ष नीटू सिंह आर्य, प्रदीप पुंडीर, कुंवर पाल, प्रदीप सैनी, मुनीश आर्य, अनुज सैनी, कार्तिक प्रजापति, मांगेराम, आलोक, सुमित्रा, सरोज, सोनिया, रीना, सुदेष्णा, रुचि आदि मौजूद रहे।
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