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समय से पता चले तो ब्रेन ट्यूमर का इलाज संभव

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सहारनपुर। ब्रेन ट्यूमर ऐसी बीमारी है, जिसका नाम सुनते ही मरीज के पैरों तले जमीन खिसक जाए, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की मानें तो यदि यह समय से पकड़ में आ जाए तो इलाज संभव है। खास बात यह है कि जनपद के सरकारी अस्पतालों जैसे जिला अस्पताल और राजकीय मेडिकल कॉलेज में ब्रेन ट्यूमर के इलाज की सुविधा नहीं है। ऐसे में प्राइवेट चिकित्सक और अस्पताल ही मरीजों का सहारा हैं।
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जनपद के वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ. रवि ठक्कर ने बताया कि उनकी ओपीडी में प्रति माह आने वाले मरीजों में आठ से दस फीसदी मरीजों में जांच के बाद ब्रेन ट्यूमर निकलता है। उन्होंने बताया कि ब्रेन की चार ग्रेड होती हैं। ग्रेड-1 सर्जरी के दौरान यदि पूरा निकल जाए तो फिर दोबारा नहीं होता। ग्रेड-2 में पूरा ट्यूमर नहीं निकलता, जितना निकलता है वह छह से आठ साल बाद फिर से आ जाता है। ग्रेड-3 में आठ से दस माह बाद ट्यूमर दोबारा हो जाता है और ग्रेड-4 में एक से डेढ़ माह में ही ट्यूमर बन जाता है। इसके बाद कीमोथैरेपी, रेडियो थैरेपी आदि इलाज चलते हैं, लेकिन मरीज पूरी तरह ठीक नहीं हो पाता है। अच्छा यही है कि व्यक्ति को जब भी लक्षण महसूस हों तो वह योग्य चिकित्सक के पास पहुंचे और इलाज शुरू कराए। ग्रेड-1 हो तो इलाज पूरी तरह संभव है।
कई प्रकार का होता है ब्रेन ट्यूमर
ब्रेन ट्यूमर कई प्रकार का होता है। चिकित्सकों का कहना है कि यदि ट्यूमर ब्रेन के ब्लॉयल सेल से बढ़ रहा हो तो वह ब्लायो ब्लास्टोमा ट्यूमर बन सकता है। स्टोसाइट से बढ़ रहा है तो स्टोसाइटोमा बन सकता है। वैस्कुलर टिश्यू से बढ़ रहा है तो एमिंजियोमा या एंमिंजियोब्लास्टोमा बन सकता है। अगर ट्यूमर ब्रेन के ड्यूरा हिस्से से बढ़ता है तो वह मेंनिंगजोमा ट्यूमर में परिवर्तित हो सकता है। कुछ ट्यूमर साधारण यानी बेनाइन होते हैं और कुछ मेलिग्नेंट यानी कैंसर होते हैं।
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ब्रेन ट्यूमर होने के कारण
ब्रेन ट्यूमर होने का कोई खास कारण अब तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन फिर भी इसके होने का एक कारण जेनेटिक डिसऑर्डर होता है। इसके कारण भी ट्यूमर बनते हैं। कुछ मामलों में रेडिएशन के संपर्क में आने से व्यक्ति में ब्रेन ट्यूमर विकसित हो जाता है। कई बार ऑटो इम्यून सप्रेशन के चलते भी ब्रेन ट्यूमर होता है। अधिकतर मामलों में कारण पता नहीं चल पाता है।
ब्रेन ट्यूमर का इलाज
ब्रेन ट्यूमर की पहचान करने के लिए रोगी का इमेजिंग टेस्ट किया जाता है। इस टेस्ट के तहत रोगी के ब्रेन का सीटी स्कैन, एमआरआई और पेट स्कैन किया जाता है। इनके बाद सर्जरी की जाती है। अगर रोगी बुजुर्ग है तो बेनाइन ट्यूमर होने पर सर्जरी की बजाय दवाओं से उपचार किया जाता है, क्योंकि बेनाइन ट्यूमर धीरे-धीरे बढ़ता है और इससे रोगी की जान को खतरा नहीं होता है। ज्यादातर मामलों में सर्जरी से पहले रोगी को रेडिएशन थेरेपी और कीमोथेरेपी दी जाती है। रेडिएशन थेरेपी ट्यूमर में वृद्धि रोक देती है।
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