सहारनपुर में हरिद्वार, ऋषिकेश, गंगोत्री आदि स्थानों से जल लेकर कांवड़िए बम भोले के जयकारों के साथ आगे बढ़ रहे है। पैरों में छाले है लेकिन चेहरे पर दर्द का नामोनिशान तक नहीं है। चारों ओर केसरिया रंग के अलावा अन्य कोई रंग दिखाई नहीं दे रहा है।
शहर में चहुंओर केवल भोले का जयघोष ही सुनाई दे रहा है। शिवभक्त बिना थके अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे है। कोई पहली बार तो कोई दूसरी और तीसरी बार भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था का परिचय दे रहे है।
अम्बाला-देहरादून हाइवे भोले की भक्ति के साथ देशभक्ति के ओतप्रोत रहा। अधिकांश कांवड़ पर देश की शान तिरंगा लहरा रहा था। देशभक्ति गीतों पर कांवड़िए झूमते हुए आगे बढ़ रहे थे। शिवभक्तों में भोले की आस्था के साथ देशभक्ति की भावना भी नजर आई।
ऊंची ऊंची कांवड़ पर देश का तिरंगा फहराकर बोल-बम... बम-बम के जयकारे लगाये जा रहे है। कांवड़ के साथ चल रहे डीजे पर बज रहे भजनों पर वातावरण पूर्णतया भक्तिमय बना है।
सहारनपुर में कांवड़ मार्ग पर जगह जगह लगाये गये कांवड़ शिविरों में निजी चिकित्सक कांवड़ियों की सेवा कर रहे है। सुबह से शाम और रात से सुबह तक कांवड़ियों की सेवा की जा रही है। बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्ग भी कांवड़ियों की सेवा में पीछे नहीं है। कोई कांवड़ियों के पैर दबा रहा है तो कोई उनके पैरा में पड़े छालों पर मरहम पट्टी कर रहा है।