दरअसल, सहारनपुर और कैराना लोकसभा सीट की बात करें तो यहां पर जीत हासिल करने के लिए भाजपा ने एड़ी-चोटी तक जोर लगा रखा था, लेकिन दोनों ही सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। हार के बाद भाजपा में अदंरूनी कलह भी बाहर आ गई है। आरोप-प्रत्यारोप लग रहे हैं कि कुछ स्थानीय नेताओं की वजह से पार्टी को हार मिली।
अंदरूनी कलह के बीच भाजपा आलाकमान की तरफ से सदस्यता अभियान को लेकर आदेश जारी किए हैं। बताया जा रहा है कि सदस्यता अभियान में भी यह देखा जाएगा कि जिन नेताओं पर भीतरघात का आरोप है वह इस अभियान में क्या कर पाते हैं। आम जनता का उनके साथ कुछ जुड़ाव है या फिर नहीं। इसके बाद पदाधिकारियों में बदलाव हो सकता है। हालांकि चुनाव में हार के बाद सक्रिय कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने की तैयारी चल रही है।
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मतदाता अभिनंदन समारोह को लेकर भी असमंजस
आला कमान की तरफ से निर्देश दिए गए थे कि सभी विधानसभा में मतदाता अभिनंदन समारोह किया जाए। इसमें आम जनता के बीच जाकर चुनाव में सहयोग को लेकर उनका आभार जताया जाए। दो-तीन जगहों पर यह कार्यक्रम हो चुके हैं, लेकिन कई बड़े नेता आम जनता के बीच में जाने से कतरा रहे हैं।
एक अगस्त से सदस्यता अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए आदेश मिल चुके हैं। इस अभियान के तहत कांग्रेस के संविधान बचाओ नारे की सच्चाई को भी जनता के सामने लाया जाएगा। पार्टी को भीतरघात के कारण हार देखनी पड़ी। हालांकि पदाधिकारियों में बदलाव को लेकर अभी आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी नहीं है। - डॉ. महेंद्र सिंह सैनी, जिलाध्यक्ष भाजपा