सहारनपुर में सांप्रदायिक एकता के प्रतीक बाबा श्री जाहरवीर की म्हाड़ी पर लगने वाले मेले में बुधवार को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। बैंडबाजों और ढोल-नगाड़ों के साथ नेजे की अगुवाई में 26 छड़ियां म्हाड़ी पर पहुंच गई। छड़ियों के भक्त और निशानिए नाचते-गाते हुए छड़ियों को लेकर पहुंचे। बाबा के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।
श्रद्धालुओं ने म्हाड़ी पर पहुंचकर निशान और प्रसाद चढ़ाया। इसके साथ ही 20 दिन चलने वाले मेला गुघाल की भी शुरूआत हो गई। बुधवार की दोपहर तीन बजे महानगर के विभिन्न इलाकों से बैंडबाजों और ढोल-नगाड़ों के साथ 26 छड़ियां निकलनी शुरू हो गई थी। पुरानी मंडी से नेजे के साथ सरदार छड़ी पांच बजे अंबाला रोड स्थित श्री विश्रामपुरी काल भैरव मंदिर पहुंची।
यहां नेजा और सरदार छड़ी का पूजन हुआ। इसके बाद अन्य छड़ियां भी मंदिर पर पहुंच गई। पूजन के बाद सबसे आगे नेजा चला और उसके पीछे सरदार व अन्य छड़ियां चलती रही। सभी छड़ियां जब गंगोह मार्ग पर पहुंची तो हर तरफ बाबा जाहरवीर के जयकारों की गूंज सुनाई दी। कॉल भैरव विश्रामपुरी भैरव मंदिर से गंगोह मार्ग स्थित म्हाड़ी तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल हाथ में निशान लेकर म्हाड़ी की ओर जाते हुए नजर आए।
छड़ियों के इंतजार में म्हाड़ी पर पहले से ही भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। जैसे ही नेजा और छड़ियां म्हाड़ी पर पहुंचनी शुरू हुई तो निशान चढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं सैलाब उमड़ पड़ा। पुलिस-प्रशासन के मुताबिक पहले दिन करीब एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने म्हाड़ी पर पहुंचकर निशान चढ़ाया है। वहीं, पुलिस-प्रशासन द्वारा मेले को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। चप्पे-चप्पे पर पुलिस फोर्स तैनात रही। वहीं, 20 दिन चलने वाले मेला गुघाल की शुरूआत हो गई।
रंग-बिरंगी छड़ियों के आगमन ने मोहा मन
सहारनपुर। गंगोह मार्ग पर रंग-बिरंगी छड़ियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग सड़क और छतों पर खड़े रहे। एक तरफ शाम के समय ढलता सूरज और दूसरी तरफ गंगोह मार्ग पर बैंडबाजों, ढोल-नगाड़ों के साथ चल रही 26 छड़ियों के आगमन ने सबका मन मोह लिया। मेला गुघाल पुल से लेकर मानकमऊ स्थित पूर्वी यमुना नहर तक सड़क के किनारे बने घरों की छतों पर बड़ी संख्या में बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं, पुरुष और नौजवान छड़ियों को देखने के लिए टकटकी लगाए इंतजार करते रहे। जैसे ही छड़ियों का आगमन शुरू हुआ तो हर तरफ बाबा जाहरवीर का जयघोष गूंज उठा। पूरी रात म्हाड़ी पर बाबा श्री जाहरवीर की वीरता के किस्से सुनाए गए। ढोल-नगाड़ों की थाप पर श्रद्धालुओं ने जमकर नृत्य किया।
छड़ियों की दौड़ याद करते हैं श्रद्धालु
सहारनपुर। 20 वर्ष पूर्व गंगोह मार्ग पर मानकमऊ में बड़ी नहर से म्हाड़ी तक छड़ियों की दौड़ लगती थी। बड़ी नहर से शुरू होकर दौड़ म्हाड़ी पर पहुंचकर संपन्न होती थी। निशानिए छड़ी को लेकर दौड़ते थे, जो छड़ी दौड़ में प्रथम स्थान पर रहती थी। उसके निशानियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाता था। मगर दौड़ के दौरान श्रद्धालुओं के जख्मी होने के मामले बढ़ गए थे। इसको देखते हुए प्रशासन ने दौड़ पर रोक लगा दी थी। श्रद्धालु आज भी छड़ियों की दौड़ याद करते हैं। हरियाणा के यमुनानगर से आए 65 वर्षीय भोपाल सिंह ने कहा कि छड़ियों की दौड़ का बड़ा महत्व था, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु म्हाड़ी मार्ग पर मौजूद रहते थे। देवबंद निवासी रामपाल सिंह का कहना है कि म्हाड़ी मेले के दौरान छड़ियों की दौड़ भी एक बड़ा आयोजन होता था। प्रशासन को दोबारा छड़ियों की दौड़ शुरू करानी चाहिए।
छड़ी पूजन और भंडारे का हुआ आयोजन
सहारनपुर। नगर निगम की ओर से जनमंच में छड़ी पूजन कराया गया। इसके बाद भंडारे का आयोजन किया गया। इसके साथ ही पहले दिन म्हाड़ी पर छड़ियों के पहुंचते ही जगह-जगह भंडारों का आयोजन किया हुआ। छड़ियों के भक्तों और श्रद्धालुओं ने अपनी-अपनी म्हाड़ी पर कढ़ी-चावल का प्रसाद वितरित किया।
झूले और खिलौनों की दुकानें रही आकर्षण का केंद्र
सहारनपुर। म्हाड़ी पर लगे मेले को लेकर गंगोह मार्ग खिलौनों, प्रसाद और चाट पकौड़ी की दर्जनों दुकानें लगी हुई हैं। छोटे-छोटे बच्चे अपने परिजनों के साथ दुकानों पर तरह-तरह के खिलौने खरीदते दिखाई दिए। म्हाड़ी के बराबर में खाली पड़े मैदान पर बड़े झूले और मौत का कुआं लगाया गया है। इस बार इलेक्ट्रोनिक ट्रेन वाला झूला भी बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।