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Election 2024: दुनिया में परचम, पर मर्जी से मतदान नहीं करतीं महिलाएं, पढ़िए अमर उजाला की ये खास रिपोर्ट

Fri, 12 Apr 2024 05:29 PM IST
कपिल kapil जगदीप कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर

सार

Election 2024 : महिलाओं का दुनिया में परचम है, लेकिन वे अपनी मर्जी से मतदान नहीं कर पाती हैं। अमर उजाला की यह खास रिपोर्ट पढ़िए।
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महिला। सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कितनी सदियों से दुहराया प्रश्न यही हर बार है,

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कबसे नारी पूछ रही है मेरा क्या अधिकार है।
                                       डॉ. सीता सागर

मत लोकतंत्र का आधार है। संविधान ने सभी भारतीयों को मत का अधिकार दिया है। यह मतदाता का अपना विवेक है कि वह जिस दल या प्रत्याशी को चाहे वोट करे, लेकिन लोकतंत्र की आधी ताकत यानी महिलाओं में सभी पर यह लागू नहीं होता है। वो अपनी मर्जी से मतदान भी नहीं कर पाती।

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बेशक, आज महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं, लेकिन जब बात मताधिकार के प्रयोग की आती है तो वह पुरुष के पीछे खड़ी नजर आती हैं। जब तक शादी नहीं होती तो पिता की मर्जी से मतदान करती हैं। शादी के बाद यह अधिकार पति के पास आ जाता है। 

आज के दौर में यह बात कितनी सच है कि इसे जानने के लिए महानगर में महिलाओं से बात की गई। ज्यादातर महिलाओं का यही कहना था कि घर का मुखिया गलत निर्णय नहीं लेता। इसलिए वह मुखिया के साथ चलती हैं। दिलचस्प बात यह है कि इनमें पढ़ी लिखी महिलाएं भी शामिल रहीं। पेश है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश...

अपनी मर्जी से वोट नहीं डाला 
नीलकंठ विहार निवासी 80 वर्षीय सुदेशना त्यागी बीते 58 साल से वोट कर रही हैं। उनका कहना है कि घर के मुखिया के अनुसार ही पूरा परिवार मतदान करता है। उन्होंने अपनी मर्जी से वोट नहीं डाली

परिवार की सलाह पर मतदान 
रजनी ने बताया कि शादी से पूर्व पिता और बाद में पति के कहने पर वोट करती हैं।  उनका कहना है कि घर के बड़े कभी गलत फैसला नहीं करते। इसलिए परिवार के साथ चलती हैं।

कभी पति से अलग वोट नहीं दिया
गुंजन शर्मा का कहना है कि पूरे परिवार का एकसाथ वोट देता है। जब से शादी हुई है कभी पति से अलग वोट नहीं किया है। वही नहीं पूरा परिवार एक ही पार्टी और प्रत्याशी को वोट करता है। क्योंकि चुनाव विचारधारा के आधार पर लड़े जाते हैं। 

पहले पिता, फिर पति की राय
70 वर्षीय उषा सिंघल का कहना है कि इस समय घर की मुखिया वह हैं और अपनी मर्जी से वोट डालती हैं, लेकिन जब तक पति थे तो पति के कहने पर और शादी से पहले पिता के कहने पर वोट करती थी। 

हमारा समाज पुरुष प्रधान है, जिसमें मत जैसे संवैधानिक अधिकार का प्रयोग भी 90 फीसदी से अधिक महिलाएं अपनी मर्जी से नहीं कर सकती हैं और यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। मुझे नहीं लगता कि अभी कई दशक में भी यह परंपरा खत्म होगी। - डॉ. अनिल कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर, समाजशास्त्र

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पुरुषों की तुलना में महिलाएं घर से कम निकलती हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा का स्तर कम है और वह राजनीति के बारे में ज्यादा नहीं जानती। ऐसे में वह निर्णय नहीं ले पाती कि किसे वोट करना है। यही वजह है कि वह घर के मुखिया पर निर्भर हो जाती हैं। - डॉ. विनीता दुबे, असिस्टेंट प्रोफेसर

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