बेशक, आज महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं, लेकिन जब बात मताधिकार के प्रयोग की आती है तो वह पुरुष के पीछे खड़ी नजर आती हैं। जब तक शादी नहीं होती तो पिता की मर्जी से मतदान करती हैं। शादी के बाद यह अधिकार पति के पास आ जाता है।
आज के दौर में यह बात कितनी सच है कि इसे जानने के लिए महानगर में महिलाओं से बात की गई। ज्यादातर महिलाओं का यही कहना था कि घर का मुखिया गलत निर्णय नहीं लेता। इसलिए वह मुखिया के साथ चलती हैं। दिलचस्प बात यह है कि इनमें पढ़ी लिखी महिलाएं भी शामिल रहीं। पेश है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश...
अपनी मर्जी से वोट नहीं डाला
नीलकंठ विहार निवासी 80 वर्षीय सुदेशना त्यागी बीते 58 साल से वोट कर रही हैं। उनका कहना है कि घर के मुखिया के अनुसार ही पूरा परिवार मतदान करता है। उन्होंने अपनी मर्जी से वोट नहीं डाली
परिवार की सलाह पर मतदान
रजनी ने बताया कि शादी से पूर्व पिता और बाद में पति के कहने पर वोट करती हैं। उनका कहना है कि घर के बड़े कभी गलत फैसला नहीं करते। इसलिए परिवार के साथ चलती हैं।
कभी पति से अलग वोट नहीं दिया
गुंजन शर्मा का कहना है कि पूरे परिवार का एकसाथ वोट देता है। जब से शादी हुई है कभी पति से अलग वोट नहीं किया है। वही नहीं पूरा परिवार एक ही पार्टी और प्रत्याशी को वोट करता है। क्योंकि चुनाव विचारधारा के आधार पर लड़े जाते हैं।
पहले पिता, फिर पति की राय
70 वर्षीय उषा सिंघल का कहना है कि इस समय घर की मुखिया वह हैं और अपनी मर्जी से वोट डालती हैं, लेकिन जब तक पति थे तो पति के कहने पर और शादी से पहले पिता के कहने पर वोट करती थी।