मशरूम के लिये कम्पोस्ट तैयार कराते कृषि वैज्ञानिक
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सहारनपुर। कृषि विज्ञान केंद्र ग्रामीण युवाओं को मशरूम उत्पादन के लिए प्रशिक्षण दे रहा है। कम लागत और अच्छी आय होने के चलते युवाओं में मशरूम की खेती का क्रेज पैदा हो रहा है। इसके चलते युवाओं का रुझान इसके प्रशिक्षण की ओर बढ़ रहा है।
केवीके की ओर से आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में युवाओं को मशरूम की खेती के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षणार्थियों को इसके बारे में प्रैक्टीकल भी कराए जा रहे हैं। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को गांव संसारपुर स्थित मशरूम उत्पादन केंद्र पर मशरूम उत्पादन के लिए कंपोस्ट तैयार करने से लेकर अन्य जानकारी दी। केवीके के प्रभारी और मशरूम विशेषज्ञ डॉक्टर आईके कुशवाहा ने कहा कि मशरूम की खेती एक कमरे से लेकर झोपड़ी तक में की जा सकती है। इसमें लागत भी कम और आय अधिक होती हैं। इसकी खेती को कम बजट में भी आसानी से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मशरूम को औषधीय गुणों और पौष्टिकता के लिए जाना जाता है। इसमें शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता को विकसित करने के गुण भी पाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि जनपद में पूरे वर्ष मशरूम की खेती की जा सकती है। सितंबर अक्तूबर माह में सफेद बटन मशरूम की खेती की तैयारियों का समय होता है। इसका उत्पादन नवंबर माह से अप्रैल माह तक चलता है। उन्होंने कहा कि बाजार में आवश्यकता के आधार पर ही मशरूम का उत्पादन करना चाहिए। इस दौरान आकिब, बदरूजमां, हिमांशु, प्रिंस, अंकुल कुमार, विपिन, तरूण, हयात, कंवर, हेमलता, प्रवीण, अमर, आदि मौजूद रहे।