सहारनपुर। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने हेल्पलाइन के जरिए रोजेदारों के सवालों के जवाब देते हुए बताया कि मालदार व्यक्ति को ढाई प्रतिशत जकात अदा करना जरूरी है। उन्होंने कहा इफ्तार के समय लोगों का आमतौर पर इधर-उधर के कामों में मशगूल हो जाना सही नहीं है। महिलाएं इफ्तार के ऐन वक्त पर सामान तैयार करने और पुरुष बाजार के कामों के लिए निकल जाते हैं, जो दुरुस्त नहीं है। रोजेदारों को चाहिए कि वह इफ्तार के समय बिना वजह के कामों में समय गुजारने के बजाए खुद और परिवार के साथ दस्तरखान पर इकट्ठा हो जाएं तथा अल्लाह से भरे मन से दुआ करें।
सवाल - पुल बंजारान निवासी इमरान ने पूछा कि एक मालदार मुसलमान पर जकात कितने प्रतिशत वाजिब होती है।
जवाब - मालदार मुसलमान पर जकात ढाई प्रतिशत वाजिब है। यानी 100 रुपये पर ढाई रुपये किसी गरीब, मिस्कीन, मोहताज को देने होते हैं।
सवाल - हसनपुर निवासी सलीम ने पूछा कि क्या रोजे की हालत में कपड़ों पर इत्र लगाया जा सकता है। इससे रोजा तो नहीं टूटेगा।
जवाब - शरीयत के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति रोजे की हालत में इत्र लगाता है तो इससे रोजे पर कोई असर नहीं आता है। रोजा सलामत रहता है।
सवाल - मोहल्ला शाहमादार निवासी गुलबहार ने पूछा कि इस समय मौसम सर्द-गर्म चल रहा है। यदि किसी रोजेदार का सीना जकड़ जाए और बार-बार बलगम आए तो शरीयत के अनुसार रोजे के लिए क्या हुक्म है।
जवाब - बलगम की वजह से रोजे पर कोई असर नहीं होगा और रोजा सही रहेगा।