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सिंघाडे़ की खेती कर रहे नंदी फिरोजपुर के किसान

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सिंघाडे़ की खेती कर रहे नंदी फिरोजपुर के किसान
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सहारनपुर। परंपरागत खेती में घटते मुनाफे ने किसानों का रुख कृषि विविधीकरण की ओर कर दिया है। इसमें किसान खेती में नए-नए प्रयोग भी कर रहे हैं। गांव नन्दी फिरोजपुर के प्रगतिशील किसान परिवार ने तालाब में होने वाले सिंघाडे़ को खेत में पैदा कर दिखाया है। जिससे उन्हें न सिर्फ बढ़िया मुनाफा मिल रहा है बल्कि खेत की उर्वरता को बढ़ाने में यह सहायक सिद्ध होगी।
गांव नन्दी फिरोजपुर के प्रगतिशील किसान सेठपाल सिंह और विनोद सिंह पिछले काफी समय से खेती में नए नए प्रयोग कर रहे हैं। इस बार उन्होंने तालाब की बजाए खेत में ही सिंघाडे़ की सफल खेती करके किसानों के लिए एक नई राह दिखाई है। उन्होंने सबसे पहले तीन बीघा समतल खेत की मेंढ़ों को करीब दो फुट ऊंचा किया। इसके बाद जून के तीसरे सप्ताह खेत में पानी भरकर उसकी पैडलिंग की और सिंघाडे़ की पौध की रोपाई कर दी। ट्यूबवेल के पास स्थित इस खेत में रोजाना पानी चलाकर इसमें हमेशा एक फीट से अधिक पानी रखा जाता है। रोपाई के एक सप्ताह बाद सिंघाडे़ की पौध से शाखाएं निकलनी शुरू हो जाती हैं। उनके खेत से सिंघाडे़ का उत्पादन अक्तूबर की शुरूआत से हो गया। पहले तुड़ाई में ही उन्हें 12 क्विंटल से अधिक सिंघाडे़ मिले। जिसे बाजार में 22 से 25 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा गया। उन्होंने बताया कि उन्हें एक बीघा से खर्चा निकालकर 30 से 40 हजार रुपये का मुनाफा होने की उम्मीद है। इसमें प्रति बीघा दो किलो जिंक सल्फेट एवं सल्फर, दस किलो डीएपी, पांच किलो यूरिया और साढ़े सात किलो पोटाश डाला जाता है।
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कैसे तैयार करते हैं पौध
बीज बनाने के लिए सिंघाड़े को खेत के एक हिस्से में छोड़ दिया जाता है। जिसे दिसंबर के लास्ट में निकालकर एक हफ्ते तक धूप में सुखाया जाता है, फिर बावस्टीन से शोधित कर पानी भरे ड्रम में रख देते हैं। फरवरी के पहले हफ्ते में क्यारी बनाकर इसकी नर्सरी तैयार की जाती है।
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भूमि में जीवांश कार्बन बढ़ाने में सहायक
उत्पादन लेने के बाद दिसंबर में सिंघाडे़ के बेल की जुताई खेत में ही कर दी जाती है। जिससे मृदा में जीवांश कार्बन की मात्रा को बढ़ाने में मदद मिलती है। इससे न सिर्फ भूमि की उर्वरता में वृद्धि होती है बल्कि जमीन के पीएच में भी सुधार आ जाता है।
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खेत में सिंघाड़े की खेती के फायदे
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- बाजार में 4 से 5 रुपये प्रति किलो अधिक भाव
- तुलनात्मक रूप से अधिक मिठास
- किसान को रोजाना की आमदनी
-तालाब की तुलना में अधिक साफ सुथरा
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- खेत में सिंघाडे़ की खेती करने का प्रयोग सफल रहा है। किसी भी अन्य फसल में इतना मुनाफा होना मुश्किल है। छह महीने की इस खेती से हमें 30 से 40 हजार रुपये प्रति बीघा शुद्ध लाभ होने की उम्मीद है। इसकी बेल की खेत में जुताई होने से भूमि की उर्वरता में काफी बढ़ोत्तरी होगी। इसके लिए हमें कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने प्रेरित किया है।
---- सेठपाल सिंह एवं विनोद सिंह, ग्राम नन्दी फिरोजपुर।
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