सहारनपुर। बेशक मेयर सीट पर भाजपा ने जीत दर्ज कर ली हो, मगर बोर्ड की बैठकों में होने वाले फैसलों में भाजपा मनमर्जी नहीं कर सकेगी। इसकी प्रमुख वजह पार्षद सीटों पर भाजपा को पूर्ण बहुमत न मिलना है। गौरतलब है कि भाजपा के बाद सर्वाधिक संख्या निर्दलीय पार्षदों की है, जिनका तमाम फैसलों को मनवाने में बड़ा रोल होगा।
शहर में पहली बार हुए मेयर और पार्षदों के चुुनाव में सियासी दलों के प्रत्याशियों साथ ही निर्दलीय भी खासी संख्या में रहे। कुल 70 वार्डों में से भाजपा ने 28 वार्डों पर जीत का परचम फहराया। यानी भाजपा वार्डों में पूर्ण बहुमत नहीं हासिल कर सकी। पूर्ण बहुमत के लिए भाजपा को कम से कम 36 वार्डों पर जीत हासिल करना जरूरी था। यदि भाजपा यह कर पाती तो बोर्ड की बैठकों में शहर के विकास के लिए किए जाने वाले फैसलों में वह अपनी मनमानी कर सकती थी, मगर चूंकि पूर्ण बहुमत नहीं है। ऐसे में बहुमत के लिए उसे समर्थन की जरूरत होगी। ऐसे मे यह कहना गलत नहीं होगा कि भाजपा बोर्ड बैठकों में अपनी मनमर्जी नहीं कर सकेगी।
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निर्दलीयों ने सियासी दलों को पटखनी दी
शहर के सभी 70 वार्डों पर 200 से अधिक निर्दलीयों ने पर्चे भरे थे। नतीजा यह रहा कि कुल 70 वार्डों में से 27 पर निर्दलीयों ने कब्जा किया। निर्दलीय पार्षदों की यह संख्या सत्ताधारी दल भाजपा के पार्षदों से मात्र एक कम है। निर्दलीयों ने बड़े-बड़े दलों के प्रत्याशियों को ऐसी पटखनी दी कि उनके लिए अपनी जमानतें तक बचाना मुश्किल रहा। 70 में से 27 सीटों पर जीतने का मतलब है कि बोर्ड की बैठकों में लिए जाने वाले निर्णयों में निर्दलीयों की अहम भूमिका रहेगी।
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वार्डों में राजनीतिक दलों की स्थिति
राजनीतिक दल जीते वार्डों की संख्या
भाजपा 28
निर्दलीय 27
कांग्रेस 02
बीएसपी 09
सपा 04