कोरोना संक्रमण की वजह से इस बार भी कांवड़ यात्रा पर रोक लगने की वजह से होजरी सहित कई तरह के करीब 200 करोड़ के कारोबार को झटका लगा है। यात्रा के दौरान कांवड़ यात्रियों की वेशभूषा, कांवड़ की सजावट, शिविरों के आयोजन, टेंट, खाने पीने और दवा तक के इंतजाम इन शिविरों में होते रहे हैं, लेकिन इस बार भी यह सब नहीं होगा। सहारनपुर के रास्ते ही हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी यूपी के लाखों शिवभक्त हरिद्वार से जल लेकर लौटते थे। कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले ही तैयारियां शुरू हो जाती थी।
ऐसे होता था होजरी का कारोबार
कांवड़ से संबंधित टी-शर्ट, टोपी, लोवर, बनियान, अंडरवियर, बैग सहित होजरी का 150 करोड़ से अधिक का कारोबार होता था। इसी तरह से अधिकांश कांवड़ शिविरों में 24 घंटे कांवड़ियों के लिए भोजन की व्यवस्था की जाती थी, जिसमें करीब 50 करोड़ के करीब की खाद्य सामग्री लगती थी। इसके अलावा डीजे, ट्रांसपोर्टेशन और दवाओं के कारोबार में भी इजाफा होता था।
कई प्रदेशों और पड़ोसी जिलों में जाता है सामान
जिले से बड़े पैमाने पर होजरी का कारोबार होता है। यहां से कांवड़ से संबंधित सामान हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, बिहार और आसपास के जिलों में भी सप्लाई होता था, लेकिन बीते वर्ष की तरह इस बार भी कारोबार ठंडा है।
हिरनमारान के कपड़ा व्यापारी योग चुघ का कहना है कि कोलकाता के बाद सहारनपुर में सबसे बड़ा होजरी का कारोबार है। कांवड़ यात्रा शुरू होने से पूर्व 150 करोड़ से अधिक कारोबार होता था। कोरोना से बचाव जरूरी है। व्यापारी सरकार के फैसले के साथ हैं। होजरी कारोबारी संजीव और यश का कहना है कि कारोबार पर काफी असर पड़ा है।
सहारनपुर में कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ा कारोबार होता था, लेकिन कोरोना संक्रमण की वजह से कारोबार दो साल से चौपट है। वहीं, शिविर संचालक संजय कर्णवाल का कहना है कि जिले में 20 से अधिक कांवड़ शिविर लगते थे, जिससे कई तरह कारोबार में इजाफा होता था। मगर, कोरोना संक्रमण से बचाव भी जरूरी है।