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जिला योजना

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धनाभाव में विभागों ने योजनाएं बनानी बंद की
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सहारनपुर। विकास के नाम पर वोट मांगने वाले राजनीतिक दल सत्ता में आने के बाद विकास को लेकर कितना गंभीर रहते हैं। इसका अंदाजा जिला योजना के तहत शासन से की जाने वाली धन की मांग और उसके बाद मिलने वाले धन की मात्रा से सहज ही लगाया जा सकता है। आलम यह है कि कई विभागों को वर्षों से एक फूटी कोडी तक नहीं मिली है। ऐसे विभागों ने योजनाएं ही बनानी बंद कर दी हैं।
जिला योजना से जिले के करीब 36 सरकारी विभागों की 45 परियोजनाएं जुड़ी हुई हैं। जनपद के विकास के लिए प्रत्येक वर्ष जिला योजना समिति शासन से धन की मांग करती है। पिछले तीन साल का रिकार्ड उठाकर देखें तो सहारनपुर को मांग का एक तिहाई भी धन नहीं मिला है। कम पैसा मिलने की वजह से अनेक विभागों के हिस्से में पैसा नहीं आ पाता है। ऐसे विभागों ने जिला योजना समिति की बैठकों में हिस्सा लेना बंद कर दिया है। इतना ही नहीं, कई साल से हो रही अनदेखी की वजह से विभागों ने योजनाएं तक बनानी बंद कर दी हैं।
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खेल और स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी
सरकारें खेलों को बढ़ावा देने और आम आदमी को बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं देने के बड़े-बड़े वादे करती आई हैं। मगर जिला योजना के तहत जनपद के विकास के लिए मिलने वाले पैसे में इन्हीं विभागों की अनदेखी होती आई है। पिछले तीन साल से खेल विभाग को एक भी रुपया नहीं मिला है। ऐसे में खेल विभाग ने योजनाएं बनानी और बैठकों में हिस्सा लेना बंद कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग में होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक विभाग के साथ भी यही व्यवहार हो रहा है। लघु सिंचाई विभाग की बात करें तो चूंकि जनपद के सभी ब्लाक डार्क जोन में हैं। ऐसे में इस विभाग को किसानों के बोरिंग आदि कराने के लिए मिलने वाला धन नहीं मिल पा रहा है।

पिछले तीन साल में मिला धन
वर्ष मांग मिला
2014-15 149 करोड़ 37 लाख 27 करोड़ 18 लाख 50 हजार
2015-16 344 करोड़ छह लाख 144 करोड़ 11 लाख 79 हजार
2016-17 351 करोड़ 15 लाख 79 करोड़ 94 लाख 85 हजार

इस बार मांगे 349 करोड़ 35 लाख
जिला योजना समिति की बैठक पांच दिन पहले ही विकास भवन सभागार में हुई। इसकी अध्यक्षता जिले के प्रभारी मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने की थी। बैठक में 349 करोड़ 35 लाख रुपये की डिमांड सरकार से की गई है। सड़कों के लिए निर्धारित 24 करोड़ की सीमा को बढ़ाने की मांग भी मंत्री से की गई। मंत्री ने वादा किया कि वह जिले के विकास के लिए अधिक से अधिक धन आवंटित करा े का प्रयास करेंगे।
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जिला अर्थ संख्या अधिकारी इंद्रपाल सिंह ने बताया कि शासन से जितने धन की डिमांड की जाती है उतना मिलता नहीं है। ऐसे में कई विभागों के हिस्से में पैसा नहीं आ पाता है। यही वजह है कि खेल विभाग समेत कई विभागों ने बैठकों में हिस्सा ही लेना बंद कर दिया है।
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