जीवन में खुशी कब मिल जाए किसी को नहीं पता। मोहम्मद यूसुफ को ही देखिए जिन्हें 55 वर्ष की उम्र में भी मास्साब बनने की खुशी मिल रही है। उर्दू शिक्षकों की भर्ती में आए यूसुफ का सरकारी शिक्षक बनना तय हो गया
एक जनवरी 1958 में कस्बा किठौर (मेरठ) में जन्मे मोहम्मद यूसुफ 55 वर्ष की उम्र में सरकारी शिक्षक बन जाएंगे।
यह उम्र ऐसी होती है जब सरकारी कर्मचारी अपने रिटायरमेंट के दिन गिनने शुरू कर देता है। अब उनके रिटायर होने के दिन करीब हैं, पर यूसुफ को सपा सरकार की नीति के चलते उनकी अदीब-ए-कामिल, मुअल्लिम-ए-उर्दू की डिग्री ही बुढ़ापे का सहारा बनेगी।
वर्ष 2013 में अध्यापक पात्रता परीक्षा भी यूसुफ ने उत्तीर्ण की है। यूसुफ का कहना है कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि अब इस उम्र में जाकर शिक्षक बन पाएंगे, पर सरकार द्वारा उर्दू शिक्षक भर्ती का लाभ उन्हें मिला है। काउंसिलिंग की प्रक्रिया पूरी होते ही यूसुफ जल्द ही प्राइमरी स्कूल में शिक्षक के पद पर तैनात होंगे।
मात्र छह शिक्षक पहुंचे
उर्दू शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया पूरी होने का नाम नहीं ले रही है। शिक्षक भर्ती की तीसरी काउंसिलिंग में भी सभी सीटें नहीं भर पाई हैं। तीसरी काउंसिलिंग में मात्र छह अभ्यर्थी ही पहुंचे। दो माह से चल रही प्रक्रिया में जिले में 108 शिक्षकों की भर्ती होनी हैं। बीएसए आरके श्रीवास्तव के निर्देशन में हो रही काउंसिलिंग में बीईओ प्रमोद शर्मा और शिक्षक मोहम्मद तारिक अलीम की देखरेख में आयोजित काउंसिलिंग भी 15 में से केवल छह अभ्यर्थी पहुंचे। इससे पूर्व 68 शिक्षक काउंसिलिंग करा चुके हैं। अभी भी 34 सीट रिक्त हैं।