उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बारहवीं पास छात्र-छात्राओं को दिए गए लैपटॉप से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनके पिता मुलायम सिंह यादव की फोटो हटाना नामुमकिन हो गया है। कुछ विद्यार्थियों ने इसकी कोशिश की तो उनके लैपटॉप ही क्रैश हो गए ।
उठे सवाल, लैपटॉप पर मुलायम की फोटो क्यों?
हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, कुछ विद्यार्थियों ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दिए गए लैपटॉप में लगे टेंपरप्रूफ वॉलपेपर्स को हटाने का प्रयास किया लेकिन उनके लैपटॉप क्रैश हो गए। बाद में एचपी के इंजीनियर्स ने इसे ठीक करने की कोशिश की तो ऑपरेटिंग सिस्टम (लाइनक्स) ने ही काम करना बंद कर दिया।
गौरतलब है कि लैपटॉप के वॉलपेपर पर ही मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की फोटो लगी है और अमेरिकन कंपनी एचपी ने इनकी सप्लाई की है।
यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड के मार्केटिंग मैनेजर विष्णु मोहन ने बताया कि लैपटॉप क्रैश होने की शिकायतें उन्हें मिली है। उन्होंने बताया कि लैपटॉप के वालपेपर टेंपरप्रूफ हैं, इन्हें हटाया नहीं जा सकता। छेड़खानी करने से ये लैपटॉप क्रैश हो जाएंगे।
विष्णु मोहन ने कहा, 'जिन छात्र-छात्राओं के लैपटॉप क्रैश हुए हैं, उन्हें वॉलपेपर न हटाने के निर्देश दिए गए थे। अध्यापकों ने भी उन्हें ऐसा करने से मना किया लेकिन उन्होने लैपटॉप पाते ही पहला काम वॉलपेपर हटाने का किया, जिसका नुकसान उन्हें उठाना पड़ा। यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड के पास ही लैपटॉप के वितरण की जिम्मेदारी है।
खरीदने से किया इनकार
वहीं कुछ विद्यार्थियों ने लैपटॉप को बाजार में बेचने की कोशिश भी की लेकिन दुकानदारों ने इन्हें लेने से मना कर दिया। दरअसल यूपी सरकार ने जो लैपटॉप बांटे हैं, वे सामान्य लैपटॉप से अलग हैं। इसलिए दुकानदार भी इन्हें खरीदने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
प्रदेश सरकार द्वारा प्रत्येक विद्यार्थी को दिए गए लैपटॉप को एक विशेष नंबर दिया गया है। सरकार ने नंबर के आधार पर ही विद्यार्थियों में लैपटॉप वितरित किए हैं। किस नंबर का लैपटॉप किसे दिया गया है इसका पूरा रिकॉर्ड सरकार के पास है।
लैपटॉप देने से पहले विद्यार्थियों से निजी उपयोग में लेने संबंधित सहमति पत्र भी भरवाया गया है। सहमति पत्र में संबंधित लैपटॉप का विस्तृत विवरण दर्ज है। ऐसे में यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि बाजार में बेचा गया लैपटॉप किस विद्यार्थी का है।