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धर्म, अध्यात्म की नगरी में भव्य पंडाल

Wed, 16 Jan 2013 12:00 PM IST
महाकुंभ नगर/ब्यूरो
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महाकुंभ नगरी में भव्य पंडाल के साथ भव्य प्रवेश द्वार बनाए गए हैं। लाखों रुपये की लागत से तैयार देवी, देवताओं की प्रतिमाओं से सजे ये भव्य द्वार इन दिनों श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
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मेला क्षेत्र में प्रवेश करते ही सेक्टर चार मोरी मार्ग पर भारत सेवाश्रम संघ का भव्य पंडाल है। इसका प्रवेश द्वार श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। तकरीबन 50 फीट के इस प्रवेश द्वार में सबसे ऊपर समुद्रमंथन करते देवों और असुरों की प्रतिमाएं बनाई गई हैं।

इसके नीचे द्वार के दोनों ओर चार-चार देवताओं की प्रतिमाएं लगी हैं। द्वार के खंभों पर भगवान गणेश, भगवान राम, हनुमान की भी प्रतिमाएं स्थापित हैं। शिविर में प्रदर्शनी लगाई गई है, जिसमें रामायण और महाभारत से जुड़े पात्रों की प्रतिमाओं के साथ युद्ध आदि का दृश्य तैयार किया गया है।
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शिविर संचालक स्वामी भास्करानंद के मुताबिक पिछले 75 वर्ष से शिविर लग रहा है। श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए प्रदर्शनी सुबह छह से रात दस बजे खुली रहती है।

टेऊ राम सत्संग शिविर
मेला क्षेत्र के सेक्टर पांच में शंकराचार्य मार्ग पर साई टेऊ राम सत्संग शिविर लगा है। इसका प्रवेश द्वार 60 फीट ऊंचा है, जो मेला क्षेत्र में काफी दूर से नजर आ जाता है। प्रवेश द्वार में गुंबद की आकृति बनाई गई है, जबकि द्वार के दोनों तरफ प्रेम प्रकाश तीर्थ ट्रस्ट के संस्थापकों के बड़े-बड़े चित्र लगे हैं।

सत्संग पंडाल भी बेहद आकर्षक है। इसमें ट्रस्ट के संस्थापक रहे स्वामी टेऊ राम की सिंहासन पर प्रतिमा है। उनके ठीक बगल में तीन शिष्यों की भी प्रतिमाएं हैं। संचालन स्वामी चरण दास के मुताबिक शिविर में 21 से 28 जनवरी तक रासलीला का मंचन होगा।

मलुक दास का शिविर
सेक्टर दो में महावीर चौराहा के पास बाबा मलुक दास के शिविर का प्रवेश द्वार मेले में सबसे अलग है। तकरीबन 80 फीट ऊंचे प्रवेश द्वार पर सात घोड़ों के रथ पर भगवान कृष्ण और देवी की प्रतिमाएं लगी हैं। सफेद कपड़े से तैयार यह प्रवेश द्वार मेले में अलग छटा बिखेर रहा है। शिविर संचालक के मुताबिक शिविर आम लोगों के लिए 20 जनवरी को खुलेगा। इस दिन से शिविर में रासलीला का मंचन शुरू होगा।

कार्षणि आश्रम शिविर
सेक्टर 12 झूंसी में छतनाग मार्ग पर स्थित कार्षणि आश्रम शिविर का प्रवेश द्वार भी श्रद्धालुओं को लुभा रहा है। इसके अंदर प्रवेश करते ही सामने प्लास्टर ऑफ पेरिस से पहाड़ बनाया गया है, जिसमें गंगा, यमुना, सरस्वती की प्रतिमाएं लगी हैं। बीच में फव्वारा लगा है। व्यवस्थापक स्वामी हरिदास के मुताबिक प्रवेश द्वार की डिजाइन विशेषज्ञों से तैयार कराई गई है। बताया कि शिविर में प्रवचन बुधवार से शुरू होंगे।
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