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'दारुल उलूम में 28 वर्षों से झेल रहा हूं उत्पीड़न'

Wed, 16 Jan 2013 11:20 AM IST
देवबंद/ब्यूरो
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दारुल उलूम के वरिष्ठ उस्ताद कारी अबुल हसन आजमी ने इस्तीफा देने के बाद दारुल उलूम प्रबंधन पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि वे 28 साल से उत्पीड़न झेल रहे हैं।
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तजवीद और किरात विभाग के पूर्व अध्यक्ष कारी अबुल हसन आजमी ने दारुल उलूम के उपेक्षा पूर्ण रवैये से नाराज होकर सोमवार को मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम बनारसी को 40 पेज का इस्तीफा सौंपा था। मंगलवार को कारी आजमी ने दारुल उलूम प्रबंधतंत्र पर तानाशाह रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले 28 वर्षों में प्रबंधन ने उन्हें कई तरह से परेशान किया है। इसी उत्पीड़न के कारण उन्हें इस्तीफा देने को मजबूर होना पड़ा।

कारी आजमी ने कहा कि सच्चाई यह है कि कुछ लोगों के घेरे में आकर दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम बनारसी हल्के साबित हुए हैं। प्रबंधतंत्र में बैठे लोग सिर्फ अपना हुक्म चलाते हैं। उन्होंने संस्था के कई पदाधिकारियों पर साजिश के तहत उन्हें फंसाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह कोई भी बात हो साफ लफ्जों में करते हैं, जबकि हुक्मरानी के चलते दारुल उलूम में उनके बोल पसंद नहीं किए जाते थे।
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उन्होंने मौलाना गुलाम मोहम्मद वुस्तानवी का हवाला देते हुए कहा कि उस प्रकरण को लेकर भी उनसे कुछ सवाल किए गए, जिसके जवाब में उन्होंने कहा था कि वुस्तानवी मेरा दोस्त है और हमेशा रहेगा। कारी आजमी ने कहा कि यदि प्रबंधतंत्र उनका इस्तीफा मंजूर नहीं करता और वापस बुलाता है तो वह पूर्व के अध्यक्ष पद पर कायम होकर ही वापस लौटेंगे।
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उन्होंने भावुक होकर कहा कि दारुल उलूम प्रबंधन से विवाद चलता रहेगा, लेकिन जिस मदरसे से तालीम हासिल की है उसके छूटने का गम उन्हें सारी जिंदगी रहेगा।
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