गाजियाबाद के डासना जेल में सलाखों की पीछे बनी रेडीमेड शर्ट अब जल्द ही खुले बाजार में लांच होने जा रही हैं।
दिल्ली की तिहाड़ जेल की तर्ज पर जिला कारागार में भी बंदियों के हाथों बना सामान पहली बार खुले बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध होगा।
इसके लिए शहर के व्यापारियों से बात की जा रही है। जेल प्रशासन खुद का भी एक काउंटर जेल के बाहर शुरू किये जाने पर विचार कर रहा है।
रेडीमेड शर्ट की खुले बाजार में होने जा रही बिक्री की पुष्टि करते हुए जेल अधीक्षक डा. वीरेश राज शर्मा ने बताया कि बंदी सुधार कार्यक्रम के तहत जेल के अंदर ही बंदियों की एक सोसाइटी बनाकर इस काम की शुरूआत की गई है।
इसके लिए जेल प्रशासन बाहर से कपड़ा और कच्चा माल खरीदकर बंदियों को उपलब्ध कराया। 15 दिन पूर्व शुरू की गई इस योजना के नतीजे अब सामने आने लगे हैं। बंदियों ने करीब दो हजार शर्ट तैयार कर ली हैं।
जेल अधीक्षक ने बताया कि गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए फिलहाल कॉटन की शर्ट तैयार की गई हैं। इन पर ‘डिस्ट्रिक जेल गाजियाबाद का लोगो’ भी लगाया गया है। फिलहाल दो क्वालिटी की शर्ट तैयार की गई हैं।
इनकी कीमत भी 238 और 300 रुपये रखी गई है। उन्होंने बताया कि फिलहाल इस काम में 25 बंदियों को लगाया गया है। प्रत्येक बंदी को प्रति शर्ट तैयार करने के हिसाब से मेहनताना भी दिया जाता है।