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ऐसी है यूपी पुलिस! रेप पीड़िता को फटकारा

Fri, 25 Jul 2014 11:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, प्रतापगढ़
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यूपी में प्रतापगढ़ के एसपी कार्यालय परिसर में बृहस्पतिवार को हुई एक घटना ने फिर यूपी पुलिस का अमानवीय चेहरा सामने ला दिया।
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इंसाफ की गुहार लेकर एसपी दफ्तर पहुंची अंतू थाना क्षेत्र निवासी दुराचार पीड़िता को एएसपी ने इस कदर फटकार लगाई कि वह कार्यालय परिसर में ही बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ी।

अफसर के इस व्यवहार से नाराज वकीलों ने हंगामा शुरू किया तो आननफानन में पीड़िता को अस्पताल भेजा गया।

पीड़िता के भाई का आरोप है कि 20 हजार रुपये न देने पर ही पुलिस ने रेप की एफआईआर नहीं दर्ज की। हालांकि अंतू थाना प्रभारी का कहना है कि युवती को बहला-फुसलाकर भगाने और दुराचार का मामला दर्ज कर लिया गया है। देर शाम तक किशोरी का मेडिकल नहीं कराया जा सका था।
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अंतू इलाके की पीड़िता जब भाई के साथ एसपी कार्यालय पहुंची, उस समय एसपी दफ्तर में मौजूद नहीं थे। युवक ने अपर पुलिस अधीक्षक राममूर्ति यादव को शिकायती पत्र सौंपा।

इसमें आरोप लगाया गया था कि दो युवकों ने उसकी बहन को बंधक बनाकर उससे दुष्कर्म किया। शिकायती पत्र में कहा गया है कि उसकी मुंबई में लांड्री चलती है। इन दिनों उसकी मां वहीं थी।

लांड्री में सुल्तानपुर जिले के पीपरपुर थाना क्षेत्र स्थित अवझी गांव निवासी हौंसिला भी काम करता है। युवक का आरोप है कि 19 जुलाई को वह मजदूरी करने गया था। इसी बीच हौंसिला उसके घर पहुंचा।

उसने घर पर मौजूद उसकी बहन को बताया कि मुंबई से  लौटते वक्त रास्ते में उसकी मां का एक्सीडेंट हो गया है और वह अस्पताल में भर्ती है। इस पर बहन उसके साथ चली गई।

20 हजार रुपये मांग रही थी पुलिस

युवक का आरोप है कि उसकी बहन को हौंसिला बाइक से अपने घर ले गया और वहां तीन दिन तक बंधक बनाकर उससे दुष्कर्म किया। आरोपी के एक साथी ने भी किशोरी से मनमानी की। युवक को जब पता चला कि उसकी बहन को हौंसिला अपने साथ ले गया है तो उसने मुंबई फोन कर जानकारी ली। पता चला कि मां वहीं मौजूद है और एक्सीडेंट की बात झूठी है। उसने थाने पहुंचकर पुलिस को जानकारी दी। इसके बाद 22 जुलाई की शाम पुलिस ने आरोपी हौंसिला के घर पहुंचकर किशोरी को बरामद कर लिया और उसे अपने साथ थाने ले आई। युवक का आरोप है कि तहरीर देने के बाद भी पुलिस ने मामला नहीं दर्ज किया। एफआईआर के लिए 20 हजार रुपए मांगे।

आक्रोशित वकीलों ने किया हंगामा
पीड़िता के भाई का कहना है कि थाने में मामला दर्ज न होने की शिकायत लेकर ही वह बृहस्पतिवार को एसपी कार्यालय पहुंचा था। आरोप है कि वहां एसपी के मौजूद न रहने पर उसने एएसपी राममूर्ति से इंसाफ की गुहार लगाई तो उन्होंने पीड़िता को ही फटकार दिया। इससे वह सहम गई और शिकायती पत्र देकर बाहर निकलते ही एसपी कार्यालय परिसर में ही बेहोश हो गई। यह देख वहां भीड़ लग गई। कई वकील भी पहुंच गए। पीड़ित ने घटना की जानकारी दी तो वकील आक्रोशित होकर हंगामा करने लगे। ये देख आनन-फानन में पीड़िता को अस्पताल ले जाया गया। हालांकि देर शाम तक उसका मेडिकल नहीं कराया गया था।
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'नौटंकी बंद कर दो, बहुत देखा है ये सब'

एसपी कार्यालय में इंसाफ की गुहार लगाने पहुंचा पीड़ित परिवार पुलिस अधिकारी के रवैये से पूरी तरह स्तब्ध रह गया था। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो एसपी कार्यालय में पीड़िता बेहोश होकर गिरने के बाद भी एएसपी का लहजा नर्म नहीं हुआ। उनका कहना था कि नौटंकी बंद करो। ऐसी नौटंकी उन्होंने बहुत देखी है। यही नहीं पीड़िता के बेहोश होने पर मीडियाकर्मी तस्वीर लेने लगे तो एसपी का पारा और चढ़ गया। वह मीडियाकर्मियों पर भी भड़क उठे। इस दौरान एसपी कार्यालय में भीड़ जमा हो गई थी।

मुकदमा दर्ज तो क्यों नहीं भेजा मेडिकल के लिए?
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में अंतू पुलिस है। थानेदार रामनरेश यादव का कहना है कि किशोरी को बहला-फुसलाकर भगाने और रेप का मुकदमा लिख दिया गया है। जबकि पीड़िता के भाई का कहना है कि उसे एफआईआर की कॉपी ही नहीं दी गई। सवाल यह भी है कि अगर मुकदमा लिख लिया गया है तो पुलिस ने पीड़िता को मेडिकल के लिए क्यों नहीं भेजा। हंगामा मचने पर अब पुलिस का यही कहना है कि शुक्रवार को पीड़िता का मेडिकल कराया जाएगा।
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