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कौड़ियों के भाव बिक रही ‘कला’

Tue, 05 Apr 2016 11:20 PM IST
ब्यूराे/अमर उजाला, रामपुर
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रामपुर में दरी बुनता बुनकर।
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जिले के करीब 50 हजार बुनकर सरकार की बेरुखी का खामियाजा भुगत रहे हैं। सरकारी इम्दाद न मिलने से उनके लिए तरक्की का रास्ता ढूंढ पाना बिना नाव के दरिया पार करने जैसा हो गया है। बुनकर आज भी गांव-गांव फेरी लगाकर अपना हुनर बेचने को मजबूर हैं। सरकार की तमाम घोषणाओं के बाद भी बैंकों ने मुंह मोड़ लिया है। पूरे साल टहलाने के बाद सिर्फ 18 बुनकरों को ही ऋण मिल सका। बुनकरों से स्वास्थ्य बीमा का प्रीमियम तो वसूल लिया, लेकिन अभी तक बीमा एजेंसी और अस्पताल नामित नहीं हो सके हैं।
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जिले में करीब 50 हजार बुनकर हैं। इनमें से अधिकतर दरी और रंगीन चादरों की बुनाई करते हैं। कई साल से बुनकर तरक्की का रास्ता तलाश कर रहे हैं, लेकिनउन्हें किसी तरह की सरकारी मदद नहीं मिल रही है। दिन-रात मेहनत के बाद भी वो गांवों में फेरी लगाकर अपना हुनर बेचने को मजबूर हैं। कच्चा माल भी पंजाब, दिल्ली, भोजपुर, पीपलसाना के बिचौलियों से उधार में महंगा खरीदना पड़ता है। बुनाई का ताना बाना भी पुरानी खड्डी पर तैयार करना पड़ रहा है।

कारोबार बढ़ाने के लिए सरकार ने क्रेडिट कार्ड के जरिये अनुदान पर ऋण दिलाने की योजना शुरू की है। इसका फायदा भी नहीं मिल रहा है। 2015-16 में हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग विभाग ने समूह बनाकर 600 बुनकरों को ऋण दिलाने प्लान तैयार किया था। विभाग ने ऋण के लिए बैंकों को फाइलें भेजी। बैंकें पूरे साल बुनकरों को टहलाती रहीं। आखिर में सिर्फ 18 बुनकरों को ही ऋण मुहैया कराया गया। स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत 2500 बुनकरों से बीमा प्रीमियम तो वसूल लिया, लेकिन अभी तक बीमा एजेंसी और अस्पताल नामित नहीं हो सके हैं। 
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