शाहबाद(रामपुर)। फर्जी दस्तावेज और अपनी नागरिकता छिपाकर शाहबाद और सिरौली में रहने वाले बांग्लादेशी युवक के मामले में लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं। बांग्लादेशी का फर्जी तरीके से जन्म प्रमाणपत्र बनने के बाद अब मतदाता सूची में वोट बनवाने के बाद उन्हें कटवाने का प्रकरण भी सामने आया है। इस मामले में भी जांच शुरू हो गई है। गर्दन को फंसती देख किसी ने बांग्लादेशी समेत अन्य तीन लोगों के नाम मतदाता सूची से कटवा दिए हैं।
भारत में अपनी नागरिकता छिपाकर और फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर रह रहे बांग्लादेशी देवाशीष को पुलिस ने दिसंबर माह में गिरफ्तार करने के बाद जेल भेज दिया था। पुलिस की जांच पड़ताल में देवाशीष द्वारा भारत में अपनी नागरिकता छिपाकर और फर्जी आईडी के आधार पर रहता हुआ पाया गया। इसी प्रकरण में बांग्लादेशी देवाशीष के जन्म प्रमाण पत्र की भी जांच की जा रही है।
अब फर्जी वोटर आईडी कार्ड और मतदाता सूची में नाम शामिल होने और कटने का मामला सामने आया है, जिसकी जांच की आंच भी कई लोगों पर आ सकती है। इस प्रकरण में तहसील बीआरसी से विवेचक को रिपोर्ट सौंप दी गई है। सूत्रों के अनुसार वर्ष 2013-14 में मतदाता सूची में किस आधार पर वोट बनवाए गए और किस बीएलओ द्वारा वोट बनवाया गया है।
उसकी भी गर्दन फंसती नजर आ रही है। बांग्लादेशी युवक देवाशीष द्वारा जितने भी भारत के फर्जी प्रमाणपत्र बनवाए गए हैं। उन सभी पर एक के बाद एक जांच बैठेगी। ज्ञात रहे कि मतदाता सूची में से देवाशीष के साथ-साथ उसके परिवार के तीन लोगों के नाम काटने के बाद कई लोगों पर पुलिस के शक की सुई घूमने लगी है। लेकिन, नगर पंचायत द्वारा जारी किए गए जन्म प्रमाण पत्र और किस आधार पर वोट बनवाए गए इसकी गुत्थी अभी नहीं सुलझी है।
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-बयान-
-नगर पंचायत द्वारा तीन दिन के बाद भी जन्म प्रमाण पत्र जारी करने के साक्ष्य नहीं मिले हैं। लगातार नगर पंचायत से संपर्क किया जा रहा है। मतदाता सूची को भी गहनता के साथ चेक किया जाएगा। फिलहाल उसकी रिपोर्ट हमें मिल गई है।
-आरके त्रिपाठी, विवेचक।
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बांग्लादेशी को आश्रय देने वाला भी आखिर कितना दोषी
शाहबाद। भारत में बांग्लादेशी को आश्रय देने वाला आखिर कितना दोषी है, वह जांच में पता लग पाएगा। शाहबाद में आश्रय देकर उसके तमाम फर्जी दस्तावेज बनवाने, घर में आश्रय देकर मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के प्रकरण में पुलिस उस जांच तक नहीं पहुंची है। बांग्लादेशी को पकड़ने के बाद जेल भेजने के बाद से क्षेत्रभर के तमाम बंगाली रफूचक्कर हो गए थे। लेकिन, मामला ठंडा होते ही फिर से सभी वापस आ गए थे। सवाल यह है शाहबाद में बांग्लादेशी को आश्रय देने वाला आखिर कितना दोषी है और पुलिस उन तथ्यों पर जांच क्यों नहीं कर रही है।
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