रामपुर। रामपुर की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है। दिवाली से पहले के मुकाबले रामपुर की हवा में अब प्रदूषण की मात्रा अधिक बढ़ी है। वहीं, जिले के कई इलाकों में तो हवा में धूल, मिट्टी, बारूद के कणों की तादाद बढ़ी है, जिससे लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। दिवाली के दो दिन बीतने के साथ ही रामपुर की हवा और भी अधिक जहरीली हो गई।
रामपुर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 208 तक पहुंच चुका है, जो कि बेहद खराब स्थिति का संकेत देता है। सामान्यत: एयर क्वालिटी इंडेक्स 50 से 100 के बीच होना चाहिए। हालांकि, पिछली बार दिवाली के दिन रामपुर का एक्यूआई 195 था। इस बार दिवाली के दिन एक्यूआई 161 था, जो पिछले साल के मुकाबले कम है।
इसके पीछे ग्रीन पटाखों का असर बताया जा रहा है, लेकिन अब रामपुर के पड़ोसी जिलों से भी हवा के साथ प्रदूषण आ रहा है, जिससे रामपुर का एक्यूआई बढ़कर 208 तक पहुंच गया है। इसका असर वातावरण में भी दिख रहा है। शनिवार सुबह को जिले में कोहरे के साथ ही काफी धुंध (स्मॉग) भी दिखाई दिया।
अस्थमा के मरीजों को होगी बेहद परेशानी : जब भी शहर की आबोहवा खराब होती है, तो सबसे पहले इसका असर सांस के मरीजों पर पड़ता है। सबसे ज्यादा दिक्कत अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में होती है, क्योंकि हवा में धूल और बारूद के कणों की मात्रा ज्यादा होती है। इससे बचने के लिए मॉस्क का प्रयोग करना चाहिए।
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तीन दिनों यह रहा रामपुर के प्रदूषण का स्तर
चार नवंबर - 161
पांच नवंबर - 167
छह नवंबर - 208
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वायु गुणवत्ता सूचकांक का प्रभाव
एक्यूआई - स्वास्थ्य पर असर
0-50 - अच्छा, कोई खतरा नहीं
51-100 - बेहतर, सांस रोगियों के लिए दिक्कत भरा।
101-200 - अच्छा नहीं, फेफड़ों के मरीज व बुजुर्गों के लिए ठीक नहीं।
201-300 - खराब, फेफड़ों के मरीज पर बुरा असर।
क्या बोले चिकित्सक :
-आतिशबाजी के बाद प्रदूषण का सबसे अधिक असर दमा-स्वांस रोगियों पर पड़ता है। उन्हें प्रदूषण के कारण सांस लेने में दिक्कत बढ़ जाती है। साथ ही एलर्जी वाले रोगियों को भी इससे परेशानी बढ़ जाती है। बुजुर्गों और बच्चों दोनों पर आतिशबाजी के बाद बढ़ने वाले एक्यूआई स्तर यानि प्रदूषण का असर अधिक रहता है। ऐसे में बुजुर्गों व सांस के रोगियों को दिवाली के बाद कुछ दिन मॉर्निंग वॉक पर नहीं निकलना चाहिए, या फिर ऐसे क्षेत्र में जाना चाहिए जहां पेड़ व हरियाली अधिक हो। व्यस्त रहने वाले मार्गों या आबादी के बीच मॉर्निंग वॉक से कुछ दिन परहेज करना चाहिए। साथ ही मास्क का प्रयोग करना चाहिए। -डॉ. नरेंद्र गौतम