रामपुर। समाजवादी पार्टी समर्थित सदस्यों ने जिला पंचायत बोर्ड की बैठक का बहिष्कार कर दिया। गुस्साए सदस्यों ने जिला पंचायत सभागार के बाहर मैदान में धरना दिया। बाद में जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपा। वहीं, सदस्यों का कोरम पूरा न होने की वजह से जिला पंचायत बोर्ड की बैठक स्थगित कर दी गई है। अब छह जनवरी को बोर्ड की बैठक होगी, जिसमें विकास कार्यों के प्रस्ताव और आगामी कार्य योजनाओं पर चर्चा की जाएगी।
जिले के विकास कार्यों के प्रस्ताव और नए वित्त वर्ष की कार्ययोजना के अनुमोदन के लिए जिला पंचायत बोर्ड की बैठक होनी है। यह बैठक गुरुवार को जिला पंचायत सभागार में होनी थी। इसके लिए निर्धारित समय पर जिला पंचायत सदस्यों के पहुंचने का सिलसिला शुरु हो गया। लेकिन, सभागार में जिला पंचायत अध्यक्ष के अलावा कुछ सदस्य ही मौजूद थे, जबकि सपा समर्थित जिला पंचायत सदस्य परिसर के मैदान में ही धरने पर बैठ गए।
वे नारेबाजी करते हुए हंगामा करने लगे। सपा समर्थित सदस्यों का कहना था कि उनके वार्डों में विकास कार्य नहीं कराए गए हैं। सदस्यों द्वारा उठाई गई समस्याओं पर भी कोई विचार नहीं किया गया है। उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष पर भी पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया। साथ ही बैठक का बहिष्कार करने का ऐलान करते हुए बैठक स्थगित करने की मांग की, जिसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष ने बैठक स्थगित कर दी। अब ये बैठक छह जनवरी को होगी। बहिष्कार करने वालों में लखवीर सिंह, तरमीम जहां, अमरजीत सिंह, खलील अहमद अंसारी, अनुराधा चौहान, नसरीन, आसमा आदि उपस्थित रहीं।
जिला पंचायत की ओर से सभी सम्मानित सदस्यों के वार्डों में काम कराया गया है और आगे भी जारी रहेगा। इसके अलावा कुछ कार्यों के टेंडर अभी निकाले हैं, जिसमें स्पष्ट हो जाएगा कि काम सदस्यों के प्रस्तावों के आधार पर शामिल किए गए हैं अथवा नहीं। जिला पंचायत में तो कोई भी अपने विकास कार्यों के प्रस्ताव दे सकता है। सपा जनविरोधी पार्टी है और वह नहीं चाहती कि जिले का विकास हो। ज्ञापन में कई सदस्यों के फर्जी हस्ताक्षर भी करने की बात सामने आई है। - ख्यालीराम लोधी, जिला पंचायत अध्यक्ष, रामपुर।
बैठक में उपस्थित न होना दुर्भाग्यपूर्ण
रामपुर। जिला पंचायत सदस्य मुस्तफा हुसैन ने कहा की जिला पंचायत में भी राजनीतिक पार्टियां सांप्रदायिकता फैला कर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रही हैं। गुरुवार को हुई बैठक में सपा सदस्यों ने क्षेत्र की समस्या को बोर्ड की बैठक नहीं रखा और जिला पंचायत में धरना प्रदर्शन कर ग्रामीण क्षेत्रों के विकास से खिलवाड़ किया है।