सूबे में 2017 के विधानसभा चुनाव में रामपुर एक बार फिर सपा की सियासत की धुरी बनने जा रहा है। मुस्लिम वोटों को अपने पाले में खींचने का काम एक बार फिर कद्दावर नेता और सपा सुप्रीमो के बेहद करीबी आजम खां के जिम्मे होगा। सूत्रों का कहना है कि सपा ने आजम खां को मोदी की अगुवाई वाली एनडीए की केंद्र सरकार, संघ के साथ ही बसपा के खिलाफ हमलावर रुख अख्तियार करने की खुली छूट दे दी है। इस तरह की आजादी आजम खां के मिजाज के अनुकूल भी है।
अपने तल्ख और बेबाक बयानों के लिए चर्चित यूपी के कैबिनेट मंत्री आजम खां की सियासी अहमियत से सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह भली-भांति वाकिफ हैं। कब किसके खिलाफ तल्ख बयान देना है, कब खामोशी अख्तियार करनी है इसे आजम खां बखूबी जानते हैं। यही नहीं, नाराज चल रहे लोगों को वक्त रहते मनाने में भी आजम खां माहिर हैं। सपा उनकी इसी खासियत का फायदा उठाने की सोच रही है। ऐसा पार्टी का मानना है कि इस वक्त राजभवन और आरएसएस पर तीखे हमले भी मुस्लिम वोटबैंक को साधने में मददगार होंगे।
मुलायम-आजम को इस वक्त यूपी की सबसे अहम सियासी जोड़ी के तौर पर देखा जाता है। इस जोड़ी पर ही 2017 के यूपी विधानसभा चुनावों के दौरान सपा की चुनावी वैतरणी पार लगाने की जिम्मेदारी है। सपा को पता है कि अगर मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लग गई तो 2017 में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
इस वोट बैंक पर बसपा, कांग्रेस और एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी की नजरें भी हैं। अभी हाल ही में संपन्न हुए उपचुनाव में देवबंद व मुजफ्फरनगर विस सीट पर सपा की हार से पार्टी की चिंता भी बढ़ गई है। क्योंकि इन दोनों सीटों पर 2012 में सपा ने मुसलमानों की बदौलत ही जीत हासिल की थी।