रामपुर।श्रीराधा कृष्ण मंदिर में चल रही श्रीकृष्ण चरित रसायन महाकाव्य कथा में मनाए गए श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में श्रद्घानलु देर तक भक्ति भाव में खोकर नृत्य करते रहे। हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। कथा व्यास लीला रसिक महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृण ही आनंद और आनंद ही श्रीकृष्ण है। श्रीकृष्ण के चरणों में ध्यान होने पर व्यक्ति को आनंद की प्राप्ति होगी।
श्रीकृष्ण चरित प्रचार महाकाव्य समिति की ओर से प्राचीन श्रीराधा कृष्ण मंदिर में श्रीकृष्ण चरित रसायन महाकाव्य कथा के अंतिम दिन शुक्रवार वृंदावन से पधारे कथावाचक लीला रसिक जी महाराज ने कहा कि मनुष्य माया मोह में फंसकर प्रभु को भूल गया है। जबकि, वह यह जानता है कि मृत्यु सत्य है। मृत्यु सभी को आनी है तो वह क्यों इस माया मोह में फंसकर रह गया है। श्री कृष्ण किंकर जी महाराज ने कहा कि मनुष्य अपने अनुभवों से शिक्षा लेता है। जैसा अनुभव होता है वैसा ही चुनाव होता है। इसलिए जीव को अपने जीवन को सही दिशा में लगाना चाहिए। अपने अनुभवों को जीवन जीवन की सही दिशा में लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ही आनंद है और आनंद ही श्रीकृष्ण है। श्रीकृष्ण के चरणों में ध्यान लगाने बगैर परम आनंद की प्राप्ति होगी।इस दौरान गिरीराज अग्रवाल, शिवकांत अग्रवाल, शोभित, दिनेश अग्रवाल, कृष्ण अवतार, प्रवीण, मनोज, रमेश, योगेश, राजीव, सुधीर, सचिन, पंकज, अनिल, सर्वेश, विपिन, घनश्याम आदि मौजूद रहे। कथा के समापन पर आरती उतारकर प्रसाद वितरित किया गया।